पुलिस थानों के CCTV पर हाईकोर्ट सख्त, 24 घंटे कैमरे चालू रखने के निर्देश; रिकॉर्डिंग गायब हुई तो अफसर होंगे जिम्मेदार

बिलासपुर, 26 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और निगरानी व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि थानों में केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें हर समय चालू रखना और रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। लापरवाही के कारण महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

मामला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला थाने से जुड़ा है। यहां नशे के कारोबार से जुड़े एक मामले के आरोपी समेत चार लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 13 से 15 सितंबर 2024 के बीच थाने की सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सीडीआर और टावर लोकेशन उपलब्ध कराने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि घटना से एक दिन पहले ही पुलिस ने उन्हें थाने में बैठा लिया था।

ट्रायल कोर्ट में पुलिस की ओर से बताया गया कि सीसीटीवी सिस्टम की 18 महीने की स्टोरेज अवधि पूरी हो जाने के कारण संबंधित फुटेज ऑटोमेटिक रूप से डिलीट हो चुकी है। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि जब फुटेज उपलब्ध ही नहीं है, तो उसे पेश करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। इसके बाद आरोपियों की याचिका खारिज कर दी गई।

CCTV को लेकर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इससे नागरिकों के अधिकारों की भी रक्षा होती है। ऐसे में कैमरे की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कैमरा स्थापित करना।

कोर्ट ने साफ किया कि तकनीकी खराबी, प्रशासनिक लापरवाही या किसी अन्य कारण से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट नहीं होने चाहिए। यदि लापरवाही के चलते महत्वपूर्ण रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं रहती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

550 पुलिस थानों में 102.10 करोड़ की परियोजना

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि प्रदेश के 550 पुलिस थानों में सीसीटीवी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए 102.10 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम किया जा रहा है। जिला स्तरीय निगरानी समितियां हर महीने थानों में लगे सीसीटीवी सिस्टम की जांच करेंगी।

सरकार के अनुसार, 18 महीने की रिकॉर्डिंग का बैकअप सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। इस संबंध में की गई कार्रवाई और व्यवस्थाओं की रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

मुख्य सचिव और DGP को भेजा जाएगा आदेश

हाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के इस रुख के बाद प्रदेशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

साफ संदेश: पुलिस थानों में CCTV सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्वपूर्ण साधन है। रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने में लापरवाही अब जिम्मेदार अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है।

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