जगदलपुर, 11 अगस्त 2026। बस्तर पुलिस ने सामुदायिक पुलिसिंग की दिशा में एक और अभिनव पहल करते हुए थाना बोधघाट में ‘ज्ञान-बोध’ पुस्तकालय की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य थाना आने वाले प्रार्थियों और आम नागरिकों के प्रतीक्षा समय का सदुपयोग करते हुए उनमें पठन-पाठन, ज्ञानवर्धन और जागरूकता को बढ़ावा देना है।
‘बोधघाट’ में ‘बोध’ का अर्थ जागरूकता और अवेयरनेस से है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए ‘ज्ञान-बोध’ का आशय ज्ञान के माध्यम से समझ और जागरूकता विकसित करना है। पुस्तकालय में थाना आने वाले नागरिक अपनी प्रतीक्षा के दौरान बैठकर विभिन्न ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और उपयोगी पुस्तकों का अध्ययन कर सकेंगे।
बस्तर पुलिस की इस पहल से थाना परिसर में आने वाले लोगों के लिए इंतजार का समय केवल प्रतीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वे इस दौरान किताबें पढ़कर नई जानकारी और उपयोगी ज्ञान भी प्राप्त कर सकेंगे।
बस्तर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि उनके पास ऐसी पुरानी अथवा उपयोगी पुस्तकें हैं, जिनका वे अब स्वयं उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो वे अपनी इच्छानुसार थाना बोधघाट पहुंचकर पुस्तकें दान कर सकते हैं। प्राप्त पुस्तकों को सुरक्षित रूप से पुस्तकालय में रखा जाएगा, ताकि थाना आने वाले नागरिक उनका लाभ उठा सकें।
पुलिस की यह पहल पुलिस और जनता के बीच संवाद के साथ-साथ ज्ञान और जागरूकता का सेतु बनाने की दिशा में एक छोटा लेकिन सार्थक कदम है। ‘ज्ञान-बोध’ पुस्तकालय के माध्यम से थाना परिसर को केवल शिकायत और कार्रवाई की जगह न बनाकर नागरिकों के लिए ज्ञान एवं जागरूकता का केंद्र बनाने का प्रयास किया गया है।