नबरंगपुर (ओडिशा) 4जुलाई 2026/कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना की एक प्रेरणादायक मिसाल ओडिशा के नबरंगपुर जिले से सामने आई है। यहां दो महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने सिर्फ पांच बच्चों को पोलियो की जीवनरक्षक खुराक पिलाने के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल दी। बरसात के बीच उफनते इंद्रावती जलाशय को छोटी देशी नाव से पार कर वे ऐसे गांव पहुंचीं, जहां सड़क तक नहीं है। उनका यह साहसिक सफर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं।
यह मामला नबरंगपुर जिले के तेंतुलीखुंटी ब्लॉक के मंचागांव पंचायत अंतर्गत नुआ-ढेपागुड़ा गांव का है। यह गांव इंद्रावती जलाशय के दूसरी ओर स्थित है, जहां पहुंचने का एकमात्र साधन नाव है। बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ जाने से यह सफर बेहद खतरनाक हो जाता है। इसके बावजूद सरकार के पोलियो टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ता द्रौपदी जानी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तिल सांता ने गांव जाने का फैसला किया।
दोनों महिला स्वास्थ्यकर्मी छोटी देशी नाव में सवार होकर तेज बहाव के बीच इंद्रावती जलाशय पार करने निकलीं। रास्ते में कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। पानी का बहाव इतना तेज था कि दोनों महिलाओं ने नाविक की मदद करते हुए स्वयं भी नाव संभालने में सहयोग किया, ताकि सुरक्षित गांव तक पहुंचा जा सके। कई मुश्किलों के बाद वे नुआ-ढेपागुड़ा पहुंचीं और वहां मौजूद सभी पांच बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर यह सुनिश्चित किया कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।
अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद दोनों महिलाएं सुरक्षित वापस लौटीं। इस पूरे सफर का वीडियो कैमरे में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो देखने के बाद लोग दोनों महिला कर्मियों के साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं। कई लोगों ने उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था की असली नायिका बताया है।
नबरंगपुर के अतिरिक्त जिला जनस्वास्थ्य अधिकारी मलय कुमार त्रिपाठी ने भी दोनों स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे, चाहे वह कितना भी दूर-दराज़ या दुर्गम क्षेत्र में क्यों न रहता हो। उन्होंने कहा कि आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने साहस और सेवा भावना से यह साबित कर दिया है कि बच्चों के स्वस्थ भविष्य से बढ़कर उनके लिए कुछ भी नहीं है।
यह घटना न केवल पोलियो उन्मूलन अभियान के प्रति स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि उन हजारों आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पण को भी सलाम करती है, जो हर मौसम और हर चुनौती के बीच लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में जुटे रहते हैं।
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