मौत बनकर गिरी हॉस्टल की छत! IGKV में प्लास्टर गिरने से छात्र घायल, छात्रों का फूटा गुस्सा

रायपुर, 4 जुलाई।
राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) के शिवम छात्रावास में गुरुवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। छात्रावास के एक कमरे की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिससे कमरे में सो रहा एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद पूरे हॉस्टल में अफरा-तफरी मच गई और छात्रों में दहशत फैल गई। घायल छात्र को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे खतरे से बाहर बताते हुए छुट्टी दे दी गई।

हादसे में छात्र के सिर पर गंभीर चोट आई, वहीं उसका लैपटॉप, किताबें और अन्य जरूरी सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियातन प्रभावित ब्लॉक के सभी छात्रों को रातों-रात सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया, ताकि किसी बड़ी अनहोनी से बचा जा सके।

घटना की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीश चंदेल ने तत्काल आपात बैठक बुलाई। बैठक में सभी छात्रावासों के वार्डनों को अपने-अपने हॉस्टलों की भवन स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी छात्रावासों का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द शुरू करने की बात कही गई है।

हादसे के बाद छात्रों का आक्रोश भी सामने आया। उनका आरोप है कि छात्रावास की जर्जर छत और दीवारों की शिकायत लंबे समय से विश्वविद्यालय प्रशासन से की जा रही थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। छात्रों का कहना है कि मानसून की पहली ही बारिश में छत का प्लास्टर गिर जाना भवन की खराब गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था की बड़ी पोल खोलता है।

शुक्रवार को इस घटना को लेकर छात्र संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किया। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कुलपति के वाहन के सामने लेटकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, जबकि एबीवीपी ने ज्ञापन सौंपकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, सभी छात्रावासों का तत्काल स्ट्रक्चरल ऑडिट और छात्रों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून शुरू होने से पहले शैक्षणिक संस्थानों की इमारतों का संरचनात्मक परीक्षण (स्ट्रक्चरल ऑडिट) अनिवार्य रूप से कराया जाना चाहिए। समय रहते कमजोर छतों और जर्जर भवनों की मरम्मत होने से ऐसे हादसों को रोका जा सकता है और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। फिलहाल इस घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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