पुरी30जून2026/ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर 29जून को ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक देव स्नान पूर्णिमा (महास्नान यात्रा) श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुई। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से महास्नान कराया गया। इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे।
महास्नान यात्रा की शुरुआत सुबह पारंपरिक पाहंडी शोभायात्रा से हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच भगवानों को स्नान मंडप तक लाया गया, जहां विधि-विधान से उनका अभिषेक किया गया। स्नान के बाद तीनों विग्रहों को विशेष गज वेश (हाथी स्वरूप) में सजाकर भक्तों को दर्शन कराए गए।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ का 35, बलभद्र का 33, देवी सुभद्रा का 22 और शेष 18 कलशों के जल से सुदर्शन चक्र का अभिषेक किया गया। मान्यता है कि इस महास्नान के दर्शन और पूजा से भक्तों को रोग, कष्ट और दुखों से मुक्ति मिलती है।
महास्नान के बाद मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं, इसलिए उन्हें विश्राम देने के लिए मंदिर का गर्भगृह लगभग 15 दिनों तक बंद कर दिया जाता है। इस अवधि को ‘अनवसर’ कहा जाता है, जिसमें श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन नहीं होते। इसके बाद भगवान नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और फिर विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा का शुभारंभ होता है।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी पुरी में उपस्थित रहे और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। महास्नान यात्रा के दौरान पूरे पुरी शहर में भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
108 कलशों से हुआ भगवान जगन्नाथ का महास्नान, गज वेश धारण कर दिए दिव्य दर्शन