बास्तानार। बास्तानार जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने से सरपंचों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। पंचायतों में सड़क, पुलिया, सामुदायिक भवन समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य लंबे समय से अटके हुए हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर सरपंच संघ ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जनपद की सभी 34 ग्राम पंचायतों के सरपंच सामूहिक रूप से इस्तीफा देने को मजबूर होंगे।
सरपंच संघ का कहना है कि पंचायत चुनाव संपन्न हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं दिया गया है। इसके कारण पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीणों की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। गांवों में सड़क निर्माण, पुलिया निर्माण, सामुदायिक भवन और अन्य आवश्यक कार्य बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है।
सरपंच संघ ने मांग की है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम तीन महत्वपूर्ण विकास कार्यों को तत्काल स्वीकृति दी जाए। इनमें 300 मीटर सीसी रोड निर्माण, 3 मीटर की पुलिया तथा 5 लाख रुपये तक की लागत वाला सामुदायिक भवन शामिल है। उनका कहना है कि इन कार्यों से गांवों की मूलभूत जरूरतों को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है और ग्रामीणों को राहत मिलेगी।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई है। इससे पहले भी फंड की मांग को लेकर चक्का जाम जैसे आंदोलन किए जा चुके हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे जनप्रतिनिधियों में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
सरपंचों ने प्रशासन को एक महीने का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो अगले महीने की 5 से 10 तारीख के बीच जनपद पंचायत कार्यालय के सामने व्यापक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बास्तानार जनपद की सभी 34 ग्राम पंचायतों के सरपंच सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे।
सरपंच संघ का कहना है कि बिना वित्तीय संसाधनों के पंचायतों का संचालन और विकास कार्यों का क्रियान्वयन संभव नहीं है। पंचायतों को लगातार नजरअंदाज किए जाने से ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने गए जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी कमजोर पड़ रही है। अब सभी की नजर शासन और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है कि वह सरपंचों की मांगों पर क्या निर्णय लेता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो बास्तानार में पंचायत स्तर पर बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।