जगदलपुर | 04 फरवरी 2026
बस्तर की माटी की खुशबू और जनजातीय संस्कृति की जीवंत परंपराएँ एक बार फिर पूरे वैभव के साथ विश्व पटल पर अपनी पहचान दर्ज कराने को तैयार हैं। आगामी 07 से 09 फरवरी तक आयोजित होने वाला संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 अब केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि लोक संस्कृति का भव्य महोत्सव बन चुका है। आयोजन को लेकर पूरे संभाग में उत्साह चरम पर है।
इस वर्ष बस्तर पण्डुम ने लोकप्रियता के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर की प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने भाग लिया था, वहीं इस वर्ष सातों जिलों में यह संख्या बढ़कर 54,745 तक पहुँच गई है। यह आँकड़ा बस्तरवासियों की अपनी परंपरा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के प्रति बढ़ती जागरूकता और गर्व को दर्शाता है।
भागीदारी के मामले में दंतेवाड़ा जिला 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में शीर्ष पर रहा, जबकि कांकेर, बीजापुर और सुकमा जिलों से भी हजारों कलाकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
अब सभी की निगाहें संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं, जहाँ जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से चयनित 84 दलों के 705 कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। तीन दिनों तक बस्तर की फिज़ा जनजातीय नृत्यों की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज, लोक नाट्य और वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों से सराबोर रहेगी।
प्रतियोगिता के अंतर्गत 12 विधाओं में प्रस्तुतियाँ होंगी। इनमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य, 134 कलाकार जनजातीय नाटक, 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्र तथा 56 प्रतिभागी जनजातीय व्यंजनों के माध्यम से बस्तर के स्वाद और संस्कृति को जीवंत करेंगे। इसके साथ ही वन औषधियाँ, चित्रकला, शिल्प, आभूषण और आंचलिक साहित्य भी प्रदर्शित किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा।
आयोजन की सबसे सशक्त तस्वीर मातृशक्ति की भागीदारी के रूप में सामने आई है। संभाग स्तर पर चयनित 705 प्रतिभागियों में 340 महिलाएँ और 365 पुरुष शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महिलाएँ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
कुल मिलाकर, बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता, विविधता और अभूतपूर्व जनभागीदारी के साथ एक यादगार और ऐतिहासिक सांस्कृतिक आयोजन बनने जा रहा है।
बस्तर की माटी की खुशबू से महकेगा पण्डुम 2026, तीन दिन चलेगा लोक संस्कृति का उत्सव