29अप्रैल 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के दौरान दक्षिण 24 परगना के फलता विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम कंट्रोल यूनिट में भाजपा के चुनाव चिन्ह वाले बटन पर पारदर्शी टेप लगाए जाने का गंभीर आरोप लगाया। देबीपुर 177 और फलता 144 जैसे बूथों से सामने आए वीडियो ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इन वीडियो में कथित तौर पर भाजपा के बटन पर टेप दिखाई देने के बाद भाजपा नेताओं ने इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बलों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और एक मतदान केंद्र पर पहुंचकर टेप हटवाने के बाद मतदान प्रक्रिया को दोबारा शुरू कराया। इस दौरान मतदान केंद्रों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और मतदाताओं के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। भाजपा ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए चुनाव आयोग से कड़ी कार्रवाई की मांग की, जबकि तृणमूल कांग्रेस पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार बिंद ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि ईवीएम से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो संबंधित बूथों पर पुनर्मतदान कराया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
फलता, जो तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है, वहां भाजपा और टीएमसी के बीच पहले से ही कांटे की टक्कर चल रही है। ऐसे में यह विवाद चुनावी मुकाबले को और अधिक तीखा बना रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला न केवल स्थानीय बल्कि पूरे राज्य के चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है। अब सबकी निगाहें निर्वाचन आयोग की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यह विवाद लोकतंत्र की विश्वसनीयता और निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना से जुड़ा हुआ है।