जगदलपुर, 30 मई। आंगनबाड़ी केंद्रों में शुक्रवार का दिन बच्चों के लिए यादगार बन गया, जब स्वयंसेवी संगठन तितली संस्था ने शिक्षा, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए विशेष गतिविधियों का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई के बजाय मनोरंजक और व्यावहारिक तरीकों से सीखने का अवसर प्रदान करना था।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को रंग-बिरंगे कागजों से विभिन्न प्रकार के खिलौने और आकृतियां बनाना सिखाया गया। इस गतिविधि में बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। अपने हाथों से कुछ नया तैयार करने की खुशी उनके चेहरों पर साफ दिखाई दी। इस रचनात्मक अभ्यास से बच्चों की कल्पनाशक्ति, एकाग्रता और हाथों की कार्यक्षमता को भी बढ़ावा मिला।
इसके बाद बच्चों को गणित की शुरुआती समझ विकसित करने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया गया। सूखी पत्तियों, कंकड़ों और आसपास उपलब्ध प्राकृतिक वस्तुओं की मदद से उन्हें गिनती सिखाई गई। खेल के रूप में कराई गई इस गतिविधि ने बच्चों को संख्याओं को समझने और याद रखने में मदद की। शिक्षण की यह पद्धति बच्चों के लिए रोचक होने के साथ-साथ बेहद प्रभावी भी साबित हुई।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा रहा। ‘फ्राइडे प्लांटेशन’ अभियान के तहत बच्चों को पेड़-पौधों और प्रकृति के महत्व के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी गई। इसके बाद बच्चों ने स्वयं पौधे लगाए और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। नन्हे हाथों से किया गया यह पौधरोपण पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देता नजर आया।
तितली संस्था का मानना है कि बचपन में मिले व्यावहारिक अनुभव बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बच्चों को शुरू से ही प्रकृति और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ा जाए, तो वे भविष्य में जागरूक और संवेदनशील नागरिक बन सकते हैं।
यह आयोजन न केवल बच्चों के लिए सीखने का नया अनुभव लेकर आया, बल्कि यह भी साबित कर गया कि शिक्षा को रोचक बनाकर बच्चों के सर्वांगीण विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा सकते हैं।