बस्तर मॉडल की गूंज पूर्वोत्तर तक, असम में लागू होगी विकास की बस्तर गाथा :असम के उच्च अधिकारियों ने बस्तर में किया विकास कार्यों का अध्ययन, गृह प्रवेश कार्यक्रम में हुए शामिल

जगदलपुर, 1 फरवरी 2026/
छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला, जो कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतियों के लिए जाना जाता था, आज ग्रामीण विकास का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। बस्तर में संचालित विकास योजनाओं की सफलता अब देश के अन्य हिस्सों तक अपनी प्रभावी छाप छोड़ रही है। इसी क्रम में असम राज्य के उच्च अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर का दौरा कर यहाँ के “विकास मॉडल” का गहन अध्ययन किया और इसे अपने राज्य में लागू करने की मंशा भी जाहिर की।
असम से आए संयुक्त आयुक्त  ध्रुव ज्योति नाथ और उपायुक्त राजेंद्र पांडे के नेतृत्व में पहुँचे इस प्रतिनिधिमंडल ने एक्सपोज़र विजिट के तहत लोहंडीगुड़ा विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान अधिकारियों ने ग्राम पंचायत दाबपाल, एरंडवाल और छोटे परोदा में चल रहे विकास कार्यों की जमीनी हकीकत को नज़दीक से देखा।
भ्रमण के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य तब सामने आया, जब असम के अधिकारी प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल हुए। सुदूर वन क्षेत्रों में पक्के आवासों को देखकर अधिकारी अत्यंत प्रभावित नजर आए। उन्होंने स्वयं फीता काटकर हितग्राहियों को उनके नए घरों की चाबियाँ सौंपी और ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। हितग्राहियों के चेहरों पर झलकती खुशी इस बात का प्रमाण थी कि सरकारी योजनाएँ अब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुँच रही हैं।
इसके पश्चात प्रतिनिधिमंडल ने मनरेगा के तहत निर्मित आजीविका डबरी स्थलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश देते हुए कहा कि डबरी को केवल जल संरक्षण तक सीमित न रखकर इसे आय के स्थायी स्रोत के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। मछली पालन, बत्तख पालन और कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़कर समन्वित खेती मॉडल अपनाने पर जोर दिया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में नई संभावनाएँ खुल सकें।
दौरे के समापन पर असम के अधिकारियों ने बस्तर में चल रहे विकास कार्यों को “सफल और अनुकरणीय मॉडल” बताया। उन्होंने कहा कि असम और बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियाँ काफी हद तक समान हैं और बस्तर ने जिस कुशलता से चुनौतियों के बीच विकास का मार्ग प्रशस्त किया है, वह प्रेरणास्पद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर मॉडल को असम के ग्रामीण इलाकों में लागू किया जाएगा।
इस अध्ययन भ्रमण के दौरान जिला पंचायत के अतिरिक्त सीईओ  वीरेंद्र बहादुर, लोहंडीगुड़ा जनपद सीईओ  धनेश्वर पांडे, जिला समन्वयक  बी. मनिहार तथा जिला प्रोग्रामर  शशांक नाग ने स्थानीय प्रशासन की ओर से सक्रिय भूमिका निभाते हुए योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।

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