28मार्च26
कांकेर जिले के माओवादी दारसु सोरी को लेकर उसके परिवार ने भावुक अपील करते हुए मुख्यधारा में लौट आने की गुहार लगाई है। सरकार द्वारा माओवादियों के लिए 31 मार्च तक आत्मसमर्पण की डेडलाइन तय किए जाने के बीच परिजनों ने दारसु सोरी से हथियार छोड़कर घर लौट आने की अपील की है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे दारसु सोरी को सुरक्षित और सामान्य जीवन जीते हुए अपने बीच देखना चाहते हैं, क्योंकि कई वर्षों से उसके माओवादी संगठन में शामिल रहने के कारण पूरा परिवार चिंता और डर के माहौल में जी रहा है।
दारसु सोरी के भतीजे जगत सोरी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि “सरेंडर कर दो, घर में हम अकेले पड़ गए हैं, खेती करने वाला भी कोई नहीं है। अब घर की जिम्मेदारी संभालने वाला कोई नहीं बचा है। अगर दारसु सोरी वापस आ जाएंगे तो सब कुछ ठीक हो जाएगा।” उन्होंने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास और बेहतर जीवन का अवसर दे रही है, इसलिए अब हिंसा का रास्ता छोड़कर घर लौटना ही सही फैसला होगा।
परिजनों ने कहा कि जंगल की जिंदगी में हर समय खतरा बना रहता है, जबकि मुख्यधारा में लौटने पर सुरक्षित भविष्य और सम्मानजनक जीवन मिल सकता है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि 31 मार्च की डेडलाइन से पहले दारसु सोरी जैसे युवाओं को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहिए, ताकि बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास का माहौल और मजबूत हो सके। देखते है कि परिवार की यह भावुक अपील अब कितना असर करती है