24मार्च2026
जगदलपुर/बीजापुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय रहे माओवादी कमांडर पापाराव अब मुख्यधारा में लौटने की तैयारी में हैं। जानकारी के मुताबिक पापाराव अपने करीब 18 साथियों और हथियारों के साथ जल्द ही पुलिस के सामने सरेंडर कर पुनर्वास प्रक्रिया में शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि वे फिलहाल बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मौजूद हैं और अन्य साथियों के साथ बाहर आने की तैयारी चल रही है।
डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि पापाराव करीब ढाई दशकों से जंगल में सक्रिय रहे हैं और कई बड़ी घटनाओं में उनका नाम सामने आया है। सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार बढ़ते दबाव के कारण उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। पापाराव पर सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था और उनसे बातचीत भी की गई है। गृह मंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले दिनों में अन्य नक्सली भी सरेंडर कर सकते हैं।
सरकार का कहना है कि अब बस्तर क्षेत्र में सशस्त्र नक्सलवाद काफी कमजोर पड़ चुका है और बड़े स्तर के नेता लगभग खत्म हो चुके हैं। कुछ ही नक्सली बचे हैं जो पुनर्वास के लिए तैयार हो रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य 31 मार्च तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का है और इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अब जंगल में बंदूक लेकर हिंसा फैलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी और विकास कार्यों को रोकने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
पापाराव को नक्सल संगठन का बड़ा चेहरा माना जाता रहा है। वे दोरला जनजाति से जुड़े हैं और संगठन की रणनीतिक गतिविधियों में उनकी अहम भूमिका रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार लगातार दबाव, कठिन जीवन और सरकार की नई नीति के कारण उन्होंने सरेंडर का फैसला लिया है। उनके पुनर्वास से बस्तर में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका माना जा रहा है और इससे क्षेत्र में शांति और विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रशासन अब पापाराव और उनके साथियों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही वे हथियार डालकर सरकार के सामने सरेंडर करेंगे और पुनर्वास योजना के तहत नई जिंदगी शुरू करेंगे।