22मार्च2026
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में अब बदलाव की नई तस्वीर देखने को मिल रही है। कभी जंगलों में बंदूक उठाने वाले पूर्व माओवादी अब शिक्षा की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। जिला पुलिस और प्रशासन के प्रयासों से 85 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बुनियादी साक्षरता परीक्षा देकर समाज की मुख्यधारा में लौटने की मजबूत पहल की है।
यह पहल उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत की गई, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन आत्मसमर्पित माओवादियों को पढ़ना-लिखना सिखाना है, जो कभी औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे।
पुलिस और प्रशासन के अनुसार, इससे पहले 272 आत्मसमर्पित नक्सल कैडर्स बुनियादी साक्षरता प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं और अब सामान्य नागरिक की तरह जीवन जी रहे हैं। इसी कड़ी में 85 अन्य कैडर्स ने प्रशिक्षण पूरा करने के बाद साक्षरता परीक्षा में हिस्सा लिया।
छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत इन सभी को शिक्षा के साथ-साथ रोजगारमूलक प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं का लाभ और पुनर्वास की सुविधाएं भी दी जा रही हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य भटके हुए युवाओं को हिंसा के रास्ते से हटाकर शिक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाना है।
बीजापुर पुलिस लगातार सक्रिय माओवादियों से अपील कर रही है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और शासन की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें।