8जून2026
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में लगी भीषण आग के दौरान एक साधारण दुकानदार ने अपनी सूझबूझ, साहस और मानवता से ऐसा काम किया, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है। आग की भयावह घटना के दौरान जब होटल में फंसे लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंची मंजिलों से नीचे कूदने को मजबूर हो रहे थे, तब सड़क किनारे गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी ने बिना समय गंवाए अपनी दुकान के गद्दे सड़क पर बिछा दिए। उनके इस त्वरित फैसले से नीचे कूदने वाले लोगों को गंभीर चोटों से बचाने में बड़ी मदद मिली और कई जिंदगियां सुरक्षित रहीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, होटल में आग तेजी से फैल रही थी और अंदर फंसे लोगों में अफरा-तफरी का माहौल था। ऐसे में रियाजुद्दीन ने हालात की गंभीरता को समझते हुए अपने व्यवसाय की परवाह किए बिना दुकान के गद्दे बाहर निकालकर सड़क पर फैला दिए। इससे ऊपर से कूदने वाले लोगों को अपेक्षाकृत सुरक्षित लैंडिंग मिल सकी और हादसे का प्रभाव कम हुआ। उनकी इस मानवता और बहादुरी ने संकट की घड़ी में लोगों के लिए जीवनरक्षक की भूमिका निभाई।
रियाजुद्दीन मंसूरी के इस सराहनीय कार्य को देखते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वकील वीरेंद्र कसाना ने उन्हें सम्मान पत्र प्रदान किया और उनकी बहादुरी तथा मानव सेवा की भावना की प्रशंसा की। साथ ही उन्हें एक लाख रुपये की सम्मान राशि भी दी गई। सम्मान समारोह में उपस्थित लोगों ने कहा कि रियाजुद्दीन जैसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो कठिन परिस्थितियों में निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं।
यह घटना केवल साहस की कहानी नहीं है, बल्कि इंसानियत का एक ऐसा संदेश भी है जो समाज को जोड़ने का काम करता है। ऐसे समय में जब अक्सर धर्म, जाति और समुदाय के नाम पर विभाजन की बातें सुनने को मिलती हैं, रियाजुद्दीन मंसूरी ने अपने कार्य से साबित कर दिया कि इंसानियत किसी भी पहचान से बड़ी होती है। उन्होंने संकट में फंसे लोगों को केवल एक इंसान के रूप में देखा और उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास किया।
रियाजुद्दीन मंसूरी की यह पहल आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है। उनका यह साहसिक और मानवीय कदम याद दिलाता है कि समाज में अभी भी ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनके लिए मानवता सबसे बड़ा धर्म है।