8जून2026
रायपुर। कहते हैं कुछ लोग दुनिया से जाने के बाद भी अपनी पहचान छोड़ जाते हैं। राजधानी रायपुर की 12 वर्षीय सुमना कुंडु ने भी ऐसा ही कर दिखाया। गंभीर बीमारी से जूझते हुए इस नन्हीं बच्ची ने अंतिम सांस लेने के बाद अपने अंगदान के जरिए दो लोगों को नया जीवन दे दिया।
टाटीबंध निवासी लक्ष्मण कुंडु और सरस्वती कुंडु की बेटी सुमना लंबे समय से एक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी पिक्नोडाइसोस्टोसिस से पीड़ित थी। बीमारी के कारण उसके मस्तिष्क पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था। परिवार ने बेटी के इलाज के लिए देश के कई बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन आखिरकार एम्स रायपुर में उपचार के दौरान 9 दिनों तक आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद चिकित्सकों के तमाम प्रयास भी उसे बचा नहीं सके।
डॉक्टरों ने सुमना को ब्रेन डेड घोषित किया। इस दुखद घड़ी में माता-पिता ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए उसकी दोनों किडनी दान करने का निर्णय लिया। सोटो (छत्तीसगढ़ अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन) की देखरेख में दोनों किडनी जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं।
सुमना की एक किडनी तीन साल से डायलिसिस पर रह रहे 15 वर्षीय किशोर को लगाई गई, जबकि दूसरी किडनी पांच साल से डायलिसिस का सहारा ले रहे 45 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित की गई। दोनों ऑपरेशन सफल रहे और मरीजों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
परिजनों ने बताया कि सुमना को अक्सर असहनीय दर्द और दौरे पड़ते थे। उसकी पीड़ा को देखते हुए उन्होंने सोचा कि यदि उनकी बेटी किसी और की जिंदगी बचा सके तो यही उसके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
सुमना का यह अंगदान न केवल दो परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश बन गया है कि मृत्यु के बाद भी किसी की जिंदगी रोशन की जा सकती है। मानवता के इस अद्भुत कार्य के सम्मान में सुमना को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।