जनता की शिकायतों का होगा त्वरित समाधान, जल्द शुरू होगी सीएम हेल्पलाइन 1076

29मई 2026

जगदलपुर। आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की जा रही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सेवा को लेकर बस्तर जिले में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को कलेक्टर कार्यालय स्थित प्रेरणा सभाकक्ष में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को नई शिकायत निवारण प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को बताया गया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू होने के बाद नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके साथ ही वेबसाइट, मोबाइल ऐप, व्हाट्सऐप और लिखित आवेदन के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत हर शिकायत को एक यूनिक टोकन नंबर दिया जाएगा, जिससे शिकायतकर्ता अपनी समस्या की स्थिति को रियल टाइम में ट्रैक कर सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि अधिकतर शिकायतों का निराकरण सात दिनों के भीतर किया जाए। शिकायतों की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय और सचिवालय स्तर से की जाएगी, ताकि आम लोगों को समय पर राहत मिल सके।

प्रशिक्षण के दौरान सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सलाहकार अशोक चौबे और प्रशिक्षक पवन तिवारी ने अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। शिकायत समाधान के बाद संबंधित नागरिक से फीडबैक भी लिया जाएगा, जिससे सेवा की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जा सके।

सीएम हेल्पलाइन के संचालन के लिए चार स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र तैयार किया गया है। पहले स्तर पर ब्लॉक स्तर, दूसरे स्तर पर जिला स्तर, तीसरे स्तर पर संभागीय अथवा निदेशालय स्तर और चौथे स्तर पर सचिव या विभागाध्यक्ष स्तर पर शिकायतों का निराकरण किया जाएगा। यदि तय समय में शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो मामला स्वतः अगले स्तर पर भेज दिया जाएगा।

प्रशासन का मानना है कि इस नई प्रणाली से आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और शिकायतों का समाधान तय समयसीमा में सुनिश्चित हो सकेगा। इसके साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी, जिससे सुशासन को और मजबूती मिलेगी।

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