बिलासपुर | 28 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती परीक्षाओं में सामने आए बहुचर्चित प्रश्नपत्र लीक घोटाले में हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मामले में जेल में बंद तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है।
जस्टिस विभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने तीनों आरोपियों की द्वितीय जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि यह अपराध केवल कानून नहीं, बल्कि समाज और लाखों युवाओं के भविष्य के खिलाफ किया गया अपराध है।
क्या है पूरा मामला
CGPSC की इन परीक्षाओं को लेकर आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक सहित अन्य आरोपियों ने प्रश्नपत्र लीक कर अपने राजनीतिक व प्रशासनिक रसूख से जुड़े रिश्तेदारों और परिचितों तक पहुंचाए, जिससे उनका चयन सुनिश्चित किया गया।
जब चयन सूची में बड़ी संख्या में अधिकारियों और नेताओं के परिजनों के नाम सामने आए, तब इस गंभीर अनियमितता को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई।
CBI जांच में सामने आए गंभीर तथ्य
प्रारंभिक तौर पर इस मामले में ईओडब्ल्यू और एसीबी द्वारा बालोद जिले में एफआईआर दर्ज की गई। बाद में स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर राज्य सरकार ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की जानकारी दी।
CBI ने जांच पूरी कर तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करते हुए गिरफ्तारी की कार्रवाई की। प्रथम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद आरोपियों ने दूसरी बार जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अत्यंत कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा—
“प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने वाला व्यक्ति लाखों युवाओं के करियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है। यह अपराध हत्या से भी अधिक जघन्य है, क्योंकि एक हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, जबकि प्रश्नपत्र लीक से पूरा समाज प्रभावित होता है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला ‘बाड़ ही खेत को खा रही है’ कहावत का जीता-जागता उदाहरण है, क्योंकि जिन पर परीक्षा की गोपनीयता और पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, वही उसे नष्ट करने में संलिप्त पाए गए।
जमानत का कोई आधार नहीं
हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि आरोपियों ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और गोपनीयता को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया है, इसलिए उन्हें जमानत देने का कोई उचित आधार नहीं बनता।
इसी आधार पर तीनों आरोपियों की द्वितीय जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।