जगदलपुर | 28 जनवरी 2026
जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में बुधवार को आयोजित ‘बस्तर पण्डुम’ सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की मौलिक प्रतिभाओं के सजीव प्रदर्शन का मंच बनकर उभरा। इसी मंच पर दरभा विकासखंड के नेगानार निवासी चित्रकार भगत राम बघेल ने अपनी ऐसी अनूठी चित्रकारी प्रस्तुत की, जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया।
चमक-दमक वाले महंगे रंगों और आधुनिक संसाधनों से दूर, भगत राम ने यह साबित कर दिया कि सच्ची कला संसाधनों की मोहताज नहीं होती। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने प्रकृति से प्राप्त साधारण अवयवों को अपना माध्यम बनाकर कैनवास पर जीवंत रंग बिखेर दिए।
लाल भाजी, हल्दी और कोयले से रचे रंग
भगत राम ने अपनी चित्रकला में सेमी पत्ता, लाल भाजी, शलजम, हल्दी, रंगीन पत्थर, अपराजिता के फूल और लकड़ी के कोयले जैसे पूरी तरह प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया।
अपराजिता के फूलों से नीला रंग
लाल भाजी से लाल
हल्दी से पीला
लकड़ी के कोयले से काला
इन प्राकृतिक रंगों से तैयार की गई उनकी पेंटिंग्स न केवल आकर्षक थीं, बल्कि उनमें बस्तर की मिट्टी, जंगल और जीवन की सोंधी खुशबू भी साफ झलक रही थी।
संघर्ष से जन्मी अनूठी कला
इस नवाचार के पीछे संघर्ष और गुरु-शिष्य परंपरा की प्रेरक कहानी छिपी है। भगत राम बताते हैं कि एक बार चित्रकारी के दौरान उनके पास रंग समाप्त हो गए थे और बाजार से रंग खरीदने की स्थिति नहीं थी। उस कठिन समय में उनके स्वर्गीय गुरु श्री बी.आर. बघेल ने उन्हें प्रकृति से सीख लेने की प्रेरणा दी।
गुरु के मार्गदर्शन से उन्होंने आसपास उपलब्ध वनस्पतियों, फूलों और पत्थरों से रंग तैयार करने की विधि विकसित की, जो आज उनकी पहचान बन चुकी है।
बस्तर की संस्कृति और नवाचार का प्रतीक
बस्तर पण्डुम के मंच पर भगत राम की यह चित्रकारी न केवल दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी, बल्कि इसने बस्तर की समृद्ध कला संस्कृति, नवाचार और आत्मनिर्भर सोच को भी उजागर किया।
उनकी कला यह संदेश देती है कि यदि हौसला मजबूत हो और सोच रचनात्मक, तो अभाव भी सृजन की राह में बाधा नहीं बनते।
प्रकृति के रंगों से कैनवास पर उभरी बस्तर की आत्माबस्तर पण्डुम में दरभा के भगत राम की अनूठी चित्रकारी बनी आकर्षण का केंद्र