28मई 2026
रांची/झारखंड। भारत की अंडर-17 महिला फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा की संघर्षभरी कहानी अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बनती जा रही है। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने रांची में दिव्यानी के घर पहुंचकर उनके परिवार से मुलाकात की और परिवार को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया। इस दौरान उन्होंने दिव्यानी की उपलब्धियों की जमकर सराहना करते हुए उन्हें “विकसित भारत की ब्रांड एंबेसडर” बताया।
संजय सेठ ने कहा कि बेहद साधारण और छोटे से घर में दुनिया भर से जीती गई 50 से अधिक ट्रॉफियां और मेडल यह साबित करते हैं कि कठिन परिस्थितियां भी प्रतिभा का रास्ता नहीं रोक सकतीं। उन्होंने कहा कि दिव्यानी ने सीमित संसाधनों के बावजूद देश का नाम रोशन किया है और अब समाज व सरकार की जिम्मेदारी है कि उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए हर जरूरी सहयोग दिया जाए।
मंत्री ने परिवार की आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दिव्यानी की मां दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं, जबकि उनके पिता का चार साल पहले निधन हो चुका है। वहीं, दिव्यानी का भाई कमर के नीचे से लकवाग्रस्त है, जिसके इलाज की व्यवस्था अब एम्स में कराई जाएगी।
संजय सेठ ने कहा कि दिव्यानी का लक्ष्य अब 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने और मेडल जीतने के लिए प्रेरित करते हैं, और यह तभी संभव है जब खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और समर्थन मिले।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि दिव्यानी और गांव की अन्य बेटियों के लिए गांव में ही खेल मैदान तैयार किया जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियां भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि दुर्गा पूजा से पहले दिव्यानी के परिवार के लिए नया घर भी बनाया जाएगा।
दिव्यानी लिंडा की कहानी आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो अभावों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखते हैं। संघर्ष, मेहनत और जुनून से सफलता की यह मिसाल अब पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।