हिडमा के गांव पुवर्ती में बदली तस्वीर: अब गोलियों नहीं, विकास की गूंज सुनाई दे रही है

28मई 2026

बीजापुर जिले के बेहद संवेदनशील और लंबे समय तक माओवादी प्रभाव वाले पुवर्ती गांव में अब बदलाव की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। कभी जहां जंगलों के बीच बारूद, आईईडी धमाकों और बंदूकों की आवाज़ आम बात थी, वहीं अब उसी गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं और विकास कार्यों की रोशनी पहुंच रही है। कुख्यात माओवादी हिडमा के गांव के रूप में पहचान रखने वाला पुवर्ती अब धीरे-धीरे मुख्यधारा की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत गांव की कई बुजुर्ग महिलाओं का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन कराया गया है। वर्षों से धुंधली आंखों और सीमित सुविधाओं के बीच जीवन बिताने वाली महिलाएं अब साफ़ देख पाने की खुशी चेहरे पर लिए नजर आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले यहां स्वास्थ्य सुविधा की कल्पना भी मुश्किल थी, लेकिन अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव तक पहुंच रही है।

पुवर्ती जैसे दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का पहुंचना केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे और बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है। जिन इलाकों में कभी सिर्फ माओवादी गतिविधियों की चर्चा होती थी, वहां अब सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं की बात होने लगी है। ग्रामीणों में भी अब यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा, इलाज और रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह प्रशासन लगातार अंदरूनी गांवों तक पहुंचता रहा, तो बस्तर के कई ऐसे इलाके जो वर्षों तक विकास से दूर रहे, वहां भी नई शुरुआत संभव होगी। पुवर्ती की बुजुर्ग महिलाओं की आंखों में लौटी रोशनी अब पूरे बस्तर के लिए उम्मीद की नई किरण बनती दिखाई दे रही है।

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