25अप्रैल2026
मुंबई के वर्ली इलाके में 21 अप्रैल को आयोजित बीजेपी की “नारी शक्ति रैली” के दौरान भारी ट्रैफिक जाम ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। इसी जाम में फंसी एक महिला का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा जब उसने मौके पर मौजूद गिरीश महाजन और पुलिसकर्मियों पर जमकर नाराज़गी जाहिर की। महिला ने कथित तौर पर मंत्री से कहा, “यहां से निकल जाइए, आप लोग ट्रैफिक जाम कर रहे हैं,” और पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें महिला को खुलेआम अपनी नाराजगी व्यक्त करते देखा गया। बताया जा रहा है कि महिला अपनी बेटी को स्कूल से लेने जा रही थी और लंबे समय से जाम में फंसी होने के कारण परेशान थी।
वीडियो सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ गया। पुलिस ने इस घटना को लेकर महिला के खिलाफ वर्ली थाने में FIR दर्ज कर ली है। आरोप है कि महिला ने सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार किया और सरकारी काम में बाधा डाली।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक पक्ष महिला के व्यवहार को गलत ठहरा रहा है, तो वहीं दूसरा पक्ष इसे आम जनता की हताशा और गुस्से का प्रतीक बता रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शनों के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानियों के लिए जिम्मेदार कौन है।
फिलहाल यह मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून व्यवस्था, जनसुविधा और राजनीतिक गतिविधियों के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस का मुद्दा बन चुका है।