24अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित भोरमदेव अभयारण्य इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां के घने जंगलों और पहाड़ियों में एक बार फिर बाघों की मौजूदगी ने हलचल मचा दी है। हाल ही में वन विभाग द्वारा लगाए गए ट्रैप कैमरों में बाघ-बाघिन अपने दो शावकों के साथ खुले तौर पर विचरण करते हुए कैद हुए हैं। यह दृश्य न केवल रोमांचक है, बल्कि इस बात का भी संकेत है कि क्षेत्र का वन्य पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी जंगल में बाघ की मौजूदगी उस क्षेत्र की जैव विविधता और संतुलित खाद्य श्रृंखला का प्रमाण होती है। कैमरों में कैद तस्वीरों से साफ है कि बाघिन अपने शावकों के साथ सहज रूप से शिकार कर रही है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जंगल में शिकार प्रजातियों की संख्या पर्याप्त है और प्राकृतिक चक्र सही तरीके से संचालित हो रहा है। इसके साथ ही तेंदुओं की बढ़ती संख्या भी इस इलाके में वन्य जीवन के विस्तार को दर्शाती है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस समय जिले के अलग-अलग हिस्सों में चार से अधिक बाघ और बाघिन सक्रिय हैं। कई स्थानों पर उनके पैरों के निशान और गतिविधियों के संकेत भी मिले हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनकी सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की जा रही है, लेकिन लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति न बने।
जानकारों का मानना है कि बाघों की यह बढ़ती गतिविधि पास स्थित कान्हा नेशनल पार्क से भी जुड़ी हो सकती है। वहां बाघों की संख्या बढ़ने के कारण कई बाघ नए और शांत आवास की तलाश में भोरमदेव जैसे कम व्यवधान वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। पहले भी यहां बाघिनें प्रजनन के लिए आती थीं, लेकिन इस बार उनका लंबे समय तक शावकों के साथ यहां टिके रहना इस क्षेत्र की अनुकूलता को दर्शाता है।
इसी सकारात्मक माहौल को देखते हुए वन विभाग ने भोरमदेव अभयारण्य में जंगल सफारी शुरू करने की योजना बनाई है। संभावना है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में सफारी का शुभारंभ कर दिया जाएगा, जबकि मई से पर्यटकों के लिए इसे नियमित रूप से खोल दिया जाएगा। सफारी के संचालन के लिए अनुभवी एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई है और टिकट बुकिंग ऑनलाइन माध्यम से होगी।
जंगल सफारी शुरू होने से न केवल पर्यटकों को बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा, बल्कि इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। गाइड, ड्राइवर, होटल व्यवसाय और अन्य सेवाओं में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे पूरे क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर, भोरमदेव अभयारण्य में बाघों की वापसी सिर्फ एक वन्यजीव खबर नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि यदि संरक्षण सही दिशा में किया जाए, तो प्रकृति खुद अपनी खोई हुई पहचान वापस हासिल कर सकती है।