20मार्च2026
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में धर्मांतरण विधेयक को लेकर गर्माहट बढ़ गई है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने आज लोकभवन के बाहर विधेयक की प्रतिलिपि जलाई और राज्यपाल से इसे मंजूरी न देने की अपील की।
अमित जोगी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विधेयक लोगों के मौलिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। उनके मुताबिक, कानून धर्म परिवर्तन रोकने का बहाना है, लेकिन असल मकसद जनता की आस्था पर नियंत्रण स्थापित करना है।
जोगी ने आरोप लगाया कि विधेयक में प्रलोभन की परिभाषा अत्यधिक व्यापक बनाई गई है, जिससे सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी इस कानून की दायरे में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “इस कानून के जरिए धर्म के दरवाजे पर कलेक्टर को बैठा दिया गया है। अब किसी भी व्यक्ति को अपनी आस्था से जुड़े निर्णय के लिए प्रशासन की अनुमति लेनी पड़ेगी।”
इसके अलावा जोगी ने विधेयक में विवाह जैसी व्यक्तिगत चीजों को शून्य घोषित करने का प्रावधान भी गंभीर बताया। उनका कहना है कि यह छत्तीसगढ़ में पहली बार प्रस्तावित किया गया कानून है और देश के अन्य राज्यों में लागू ऐसे कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
अमित जोगी ने कहा कि इस विधेयक का जवाब जनता चुनाव, सदन और कोर्ट में देगी। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्र के अंतिम दिन यह विधेयक लाना उनकी हड़बड़ी और डर को दर्शाता है।
धर्मांतरण विधेयक का उद्देश्य
सरकार के अनुसार, विधेयक का मकसद धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को नियंत्रित करना और विवादों को रोकना है। इसके तहत धर्म परिवर्तन केवल नियम और प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही वैध होगा। जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने पर जेल और अन्य कड़ी सजा का प्रावधान है।
क्यों है छत्तीसगढ़ में कानून की जरूरत
छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों, खासकर बस्तर, जशपुर और रायगढ़ क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन के मामले सामने आए हैं। नारायणपुर क्षेत्र में यह गुटीय संघर्ष में बदल चुका है। वर्तमान में राज्य में धर्म परिवर्तन की वैधानिक प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है, जिससे विवाद बढ़ते हैं।
सरकार का कहना है कि इस विधेयक से विवाद और सामाजिक अस्थिरता को रोकने में मदद मिलेगी।