12मार्च2026
गाजियाबाद के रहने वाले 13 साल से कोमा में पड़े युवक हरीश राणा के मामले में एक भावुक और मानवीय पहल सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद उनके माता-पिता ने बड़ा निर्णय लेते हुए बेटे के अंगदान का संकल्प लिया है, ताकि उसके अंग किसी जरूरतमंद को नई जिंदगी दे सकें।
परिजनों का कहना है कि लंबे समय से बेटे को बेहोशी की हालत में देखना उनके लिए बेहद पीड़ादायक रहा है। ऐसे में अगर उसके अंग किसी और की जिंदगी बचाने में काम आ जाएं, तो यही उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि होगी। परिवार का यह कदम दुख की घड़ी में भी मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल बन गया है।
जानकारी के अनुसार, अदालत के आदेश के बाद डॉक्टरों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में आवश्यक कानूनी और मेडिकल प्रक्रिया के बाद हरीश राणा के उपयोगी अंग जरूरतमंद मरीजों को दान किए जा सकेंगे।
इस फैसले ने न सिर्फ एक परिवार के दर्द को उजागर किया है, बल्कि समाज के सामने अंगदान के महत्व और मानवता की नई मिसाल भी पेश की है।