रायपुर, 27 फरवरी 2026।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रदेश में बदलते हालात की झलक पेश की। माओवादी विचारधारा छोड़ चुके 120 आत्मसमर्पित पूर्व नक्सली सदन की कार्यवाही देखने पहुंचे। कभी बंदूक के सहारे अपनी बात मनवाने की कोशिश करने वाले ये लोग अब लोकतांत्रिक व्यवस्था को करीब से समझते नजर आए।
इनमें 1 करोड़ रुपये के इनामी रुपेश और 25 लाख रुपये के इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा जैसे नाम शामिल रहे। चैतू को 2013 के चर्चित झीरम घाटी हमला का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है, जिसमें कई कांग्रेस नेताओं की जान गई थी। करीब तीन दशक से अधिक समय जंगलों में सक्रिय रहने के बाद नवंबर 2025 में उसने साथियों सहित आत्मसमर्पण किया था। शुक्रवार को वही चैतू विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बैठकर विधायकों की बहस सुनता दिखा।
डिनर से संवाद तक
विधानसभा दौरे से एक दिन पहले गुरुवार रात उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के नवा रायपुर स्थित निवास पर इन सभी का स्वागत किया गया। रेड कार्पेट बिछाकर और पुष्प वर्षा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद सभी ने साथ बैठकर भोजन किया। औपचारिकता से परे यह मुलाकात संवाद और भरोसे की पहल मानी जा रही है।
उपमुख्यमंत्री ने प्रत्येक व्यक्ति से व्यक्तिगत बातचीत की, उनके अनुभव सुने और मुख्यधारा में आगे की भूमिका को लेकर चर्चा की।
लोकतंत्र का प्रत्यक्ष अनुभव
शुक्रवार सुबह कड़ी सुरक्षा जांच के बाद सभी को विधानसभा की गैलरी में विशेष स्थान दिया गया। सदन की कार्यवाही के दौरान वे शांतिपूर्वक बहस और प्रश्नोत्तर सुनते रहे। कई पूर्व नक्सलियों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को इतने करीब से देखा।
पुनर्वास नीति पर सरकार का जोर
विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार अब तक 2937 नक्सली आत्मसमर्पण कर पुनर्वास नीति का लाभ ले चुके हैं। वर्ष 2025 की नई नीति के तहत प्रोत्साहन राशि, कौशल प्रशिक्षण, आवास, भूमि और रोजगार की सुविधा दी जा रही है। राज्य में संचालित सात पुनर्वास केंद्रों में 1700 से अधिक पूर्व नक्सली प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।
यह पहल बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। सरकार का संदेश स्पष्ट है—हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में लौटने वालों के लिए दरवाजे खुले हैं।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में बदली तस्वीर: 120 पूर्व नक्सली बने लोकतंत्र के साक्षी, झीरम हमले का आरोपी चैतू भी गैलरी में बैठा