कांकेर में नक्सल नेटवर्क को झटका: 23 साल से सक्रिय महिला डीवीसीएम समेत तीन कैडरों ने किया सरेंडर, AK-47 भी सौंपी

कांकेर: उत्तर बस्तर क्षेत्र में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से जुड़े तीन कैडरों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में डिविजनल कमेटी सदस्य (डीवीसीएम) मल्लेश, पार्टी सदस्य रानू पोडियाम और लंबे समय से सक्रिय महिला कैडर मासे बारसा शामिल हैं। तीनों ने कांकेर पुलिस और बीएसएफ अधिकारियों के समक्ष हिंसा का रास्ता छोड़ने की घोषणा करते हुए पुनर्वास प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा जताई।
सबसे महत्वपूर्ण सरेंडर महिला माओवादी मासे बारसा का रहा, जो करीब दो दशक से अधिक समय से दंडकारण्य, अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर इलाके में सक्रिय रही थी। वह जंगल के रास्ते स्वयं हथियार लेकर पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के पास पहुंची और एके-47 राइफल सौंपते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस के अनुसार मासे संगठन की सप्लाई और लॉजिस्टिक नेटवर्क से जुड़ी अहम सदस्य रही है और कई नक्सली घटनाओं में उसकी भूमिका रही है। उस पर कुल 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि हथियार के साथ आत्मसमर्पण करने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान था।
बताया जा रहा है कि पहले आत्मसमर्पण कर चुके मल्लेश और रानू पोडियाम से मिली जानकारी, स्थानीय समाज के प्रभावशाली लोगों की पहल और मीडिया के माध्यम से बने संपर्क के बाद मासे बारसा ने यह कदम उठाया। पुलिस का मानना है कि इन आत्मसमर्पणों से क्षेत्र में सक्रिय अन्य कैडरों तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने तीनों के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जो भी माओवादी हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाना चाहते हैं, उन्हें राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आने वाले दिनों में औपचारिक कार्यक्रम आयोजित कर हथियार सुपुर्दगी और सामाजिक पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इधर, सुरक्षा बलों की कार्रवाई भी लगातार जारी है। हाल ही में बीजापुर जिले में ऑपरेशन के दौरान दो इनामी नक्सलियों को मार गिराया गया, जिन पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। लगातार चल रहे अभियानों और आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाओं से उत्तर बस्तर क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

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