सुकमा,।छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति एवं जिला पुलिस सुकमा के ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान को बड़ी सफलता मिली है। शनिवार को दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, केकेबीएन डिवीजन (ओडिशा) एवं इंद्रावती एरिया कमेटी में सक्रिय ₹76 लाख के इनामी 21 माओवादी कैडरों ने हथियारों एवं विस्फोटक सामग्री सहित आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
आत्मसमर्पण करने वालों में 03 DVCM, 05 ACM एवं 13 पार्टी सदस्य शामिल हैं, जिनमें 14 महिला कैडर भी हैं। इन कैडरों ने AK-47, SLR, INSAS, BGL लॉन्चर सहित ऑटोमैटिक हथियार एवं भारी मात्रा में एम्युनेशन सुरक्षा बलों के समक्ष जमा किया।
यह आत्मसमर्पण बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज (IPS), पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण (IPS), डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित, एसडीओपी सुकमा परमेश्वर तिलकवार (CPS), एसडीओपी कोंटा प्रशांत देवांगन (CPS) एवं डीएसपी विआशा रविकांत सहारे (CPS) की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
सुरक्षा कैम्प, सड़कें और विकास योजनाएँ बनीं निर्णायक कारण
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुदूर अंचलों में नए सुरक्षा कैम्पों की स्थापना, सड़क कनेक्टिविटी का विस्तार, लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियान एवं शासन की जनहितकारी योजनाओं की पहुँच से माओवादियों का तथाकथित स्वतंत्र विचरण क्षेत्र सिमट गया है। परिणामस्वरूप संगठन के भीतर तेजी से मोहभंग बढ़ा है और माओवादी संगठन अब अंतिम चरण की ओर अग्रसर है।
शासन की नीति अनुसार मिलेगा पुनर्वास
आत्मसमर्पित सभी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, पुनर्वास एवं अन्य सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी, ताकि वे सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की ओर आगे बढ़ सकें।
पुलिस की अपील
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण (IPS) ने कहा कि 21 माओवादी कैडरों का हथियारों सहित आत्मसमर्पण जिले में शांति और विकास की दिशा में निर्णायक बदलाव का संकेत है। वहीं आईजी बस्तर रेंज पी. सुंदरराज (IPS) ने इसे बस्तर में स्थायी शांति की ओर एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए शेष सक्रिय माओवादी कैडरों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
हिंसा से विकास की ओर : ‘पूना मारगेम’ की ऐतिहासिक सफलता, 21 इनामी माओवादी कैडरों ने छोड़ा हथियार