आदिवासी संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मूबस्तर पंडुम-2026 का संभाग स्तरीय शुभारंभ, बालिका शिक्षा और जनजातीय उत्थान का दिया संदेश

जगदलपुर, 07 फरवरी 2026/
देश की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में ही छत्तीसगढ़ की आत्मा निवास करती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहां सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और प्राचीन विरासतों के संरक्षण के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से सार्थक प्रयास कर रही है।
राष्ट्रपति  मुर्मू शुक्रवार को जगदलपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर विशाल जनसमूह और आदिवासी कलाकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति और पहचान का जीवंत प्रतिबिंब है।
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय समाज के उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान और नियद नेल्लानार योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से आदिवासी अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बेटियों की शिक्षा के लिए सरकार के साथ-साथ समाज और अभिभावकों को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों का पंजीयन यह दर्शाता है कि जनजातीय समाज आज भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति आस्था बढ़ी है और वर्षों से बंद विद्यालय फिर से खुल रहे हैं। दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, पुल, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं, जिससे बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है।
लोक संस्कृति का उत्सव है बस्तर पंडुम: राज्यपाल
राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि बस्तर की लोक-संस्कृति का उत्सव है। गौर नृत्य, परघौनी, मुरिया, माड़िया, धुरवा और लेजा जैसे लोकनृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। उन्होंने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है, जिसकी मांग देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है।
बस्तर केवल जंगल नहीं, समृद्ध संस्कृति की धरती है: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति का बस्तर पंडुम में आगमन केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद और जनजातीय समाज के लिए सम्मान है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य, गीत, वेशभूषा और जीवन-दर्शन का जीवंत मंच है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर में डर की जगह भरोसे ने और हिंसा की जगह विकास ने ले ली है। जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, आज वहां स्कूलों की घंटियां सुनाई देती हैं। नियद नेल्लानार योजना, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान ने आदिवासी क्षेत्रों में ऐतिहासिक बदलाव लाया है।
उन्होंने कहा कि बस्तर के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल, कला और संस्कृति के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस सकारात्मक परिवर्तन के सशक्त प्रमाण हैं।
कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर कोंडागांव और बास्तानार के कलाकारों की आकर्षक प्रस्तुतियां हुईं। मंच पर केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायकगण, सांसद, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।

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