बीजापुर, 15 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ शासन की “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” नीति के तहत बीजापुर जिले में शांति की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता दर्ज की गई है। साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े कुल 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा और जनविरोधी विचारधारा का परित्याग कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। इन कैडरों पर उनके संगठनात्मक पदों के अनुसार कुल 1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वालों में 21 महिला और 31 पुरुष कैडर शामिल हैं। इनमें DKSZC के साथ-साथ AOB डिवीजन और भामरागढ़ एरिया कमेटी से जुड़े माओवादी भी शामिल हैं। सभी ने भारतीय संविधान में आस्था जताते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।
माओवादी उन्मूलन अभियान में बड़ी उपलब्धि
बीजापुर जिले में 1 जनवरी 2024 से अब तक—
824 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं
1126 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं
223 माओवादी विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए हैं
यह आंकड़े राज्य की नक्सल उन्मूलन नीति और सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।
संगठनात्मक स्तर के कई बड़े कैडर शामिल
इन 52 कैडरों में डीवीसीएम, पीपीसीएम, एसीएम, एरिया कमेटी सदस्य, प्लाटून कमांडर, डिप्टी कमांडर, पीएलजीए सदस्य तथा आरपीसी के सीएनएम/DAKMS/जनताना सरकार अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे माओवादी शामिल हैं, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर पुनर्वास को चुना।
सुरक्षा बलों की संयुक्त रणनीति रंग लाई
यह आत्मसमर्पण पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज, केरिपु सीजी सेक्टर रायपुर, केरिपु ऑप्स बीजापुर सेक्टर के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक बीजापुर के निर्देशन में चलाए जा रहे संयुक्त अभियानों का परिणाम है।
डीआरजी, बस्तर फाइटर, जिला बल, एसटीएफ, कोबरा और केरिपु की कई बटालियनों ने विश्वास निर्माण, संवेदनशील व्यवहार और निरंतर संपर्क के जरिए माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
प्रत्येक कैडर को तात्कालिक सहायता
पुनर्वास प्रक्रिया के तहत आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक कैडर को 50,000 रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। आगे की विधिक प्रक्रिया और पुनर्समावेशन की कार्यवाही जारी है।
एसपी बीजापुर की अपील
बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने शेष माओवादियों से अपील करते हुए कहा—
“माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधाराओं को त्यागकर निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें। शासन की ‘पूना मारगेम’ नीति उनके भविष्य को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
यह आत्मसमर्पण न केवल बीजापुर बल्कि पूरे बस्तर अंचल में स्थायी शांति, संवाद और विकास की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
52 माओवादी कैडरों ने थामा शांति का मार्ग, बीजापुर में ‘पूना मारगेम’ से ऐतिहासिक आत्मसमर्पण1.41 करोड़ के इनामी 52 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, 21 महिलाएं भी शामिल