कोंडागांव के शिल्पकार बन्नूराम बैद देशभर के छह चयनित कलाकारों में शामिल, पारंपरिक कला के संरक्षण में योगदान को मिली पहचान
कोंडागांव 16अक्टूबर2026/ बस्तर की पारंपरिक ढोकरा शिल्पकला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले कोंडागांव जिले के शिल्पकार बन्नूराम बैद का चयन वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित शिल्प गुरु अवार्ड के लिए किया गया है। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय की ओर से जारी अंतिम चयन सूची में उनका नाम शामिल है। देशभर से इस सम्मान के लिए कुल छह शिल्पकारों का चयन किया गया है।
पीढ़ियों से चली आ रही कला को सहेज रहे बन्नूराम
माकड़ी विकासखंड के ग्राम बरकई निवासी बन्नूराम बैद लंबे समय से बस्तर की पारंपरिक ढोकरा यानी बेलमेटल शिल्पकला के संरक्षण और संवर्धन में योगदान दे रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि को केंद्रीय स्तरीय चयन समिति की 18 जुलाई 2026 को हुई बैठक में अंतिम रूप दिया गया।
बन्नूराम बैद प्राचीन लॉस्ट-वैक्स तकनीक, जिसे मधुच्छिष्ट पद्धति भी कहा जाता है, के माध्यम से धातु की कलाकृतियां तैयार करते हैं। उन्होंने इस पारंपरिक कला को जीवित रखने के साथ नई पीढ़ी को इसका प्रशिक्षण देने और इसे व्यापक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कलाकृतियों में झलकती है बस्तर की संस्कृति
बन्नूराम बैद की कलाकृतियों में आदिवासी जनजीवन, लोक संस्कृति, देवी-देवताओं और प्रकृति की झलक देखने को मिलती है। उनकी कला बस्तर की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को धातु की आकृतियों के माध्यम से सहेजने का काम करती है।
बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की उपलब्धि
शिल्प गुरु अवार्ड के लिए बन्नूराम बैद का चयन बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उनकी यह उपलब्धि न केवल पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी देगी।