17 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा, बस्तर की सुख-समृद्धि और परिवारों की खुशहाली के लिए मांगी दुआ
जगदलपुर, 12 अक्टूबर 2026। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था और विश्वास की अनूठी परंपरा शारदीय नवरात्रि के पहले दिन देखने को मिली। किन्नर समाज के सदस्यों ने रात करीब एक बजे मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर देवी को चुनरी अर्पित की और बस्तरवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। पिछले 17 वर्षों से समाज इस परंपरा का लगातार निर्वहन कर रहा है।
इस आयोजन में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी किन्नर समाज के सदस्य जगदलपुर पहुंचे। इससे पहले समाज के लोगों ने शहर के विभिन्न मार्गों से गाजे-बाजे के साथ रैली निकाली। नाचते-गाते और उत्साह के साथ मंदिर पहुंचे सदस्यों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और मां को चुनरी चढ़ाई।
संतान सुख से लेकर घर-परिवार की खुशहाली तक मांगी मन्नत
किन्नर समाज के सदस्यों ने मां दंतेश्वरी से उन परिवारों के लिए संतान सुख की कामना की, जिन्हें संतान प्राप्ति की प्रतीक्षा है। साथ ही शादी-विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने, लोगों के घर-परिवार बसने और व्यापारियों के कारोबार में बरकत की प्रार्थना की। समाज ने बस्तर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने की कामना भी की।
दो सदस्य रखते हैं निर्जला उपवास
इस परंपरा में किन्नर समाज के दो सदस्य निर्जला उपवास रखते हैं। उपवास करने वाले दोनों सदस्य बग्घी में सवार होकर चुनरी और सुहाग का जोड़ा लेकर मंदिर पहुंचते हैं। पूजा-अर्चना के बाद मां दंतेश्वरी को चुनरी अर्पित की जाती है। समाज के लिए यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ आपसी एकजुटता और परंपरा से जुड़ाव का भी प्रतीक है।
अब शहरवासियों का भी मिलने लगा सहयोग
समाज के सदस्यों के अनुसार, पहले इस आयोजन के दौरान उन्हें शहरवासियों का अपेक्षाकृत कम सहयोग मिलता था, लेकिन समय के साथ लोगों की सहभागिता बढ़ी है। अब शहर के कई चौक-चौराहों पर उनके लिए पानी और खानपान की व्यवस्था की जाती है। कई स्थानों पर आरती कर उनका स्वागत और सम्मान भी किया जाता है।
नवरात्रि के दौरान निभाई जाने वाली यह परंपरा समाज की गहरी आस्था और मां दंतेश्वरी के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाती है। हर साल दूर-दराज से लोगों का जगदलपुर पहुंचना इस आयोजन को विशेष बनाता है।