साकार हुआ पक्के आशियाने का सपना, सोमारी को मिला सुरक्षा और स्वाभिमान का नया जीवन

जगदलपुर, 17 अक्टूबर 2026/ बरसात के दिनों में जब कच्ची झोपड़ी की छत से पानी टपकता था, तब जीवन भर हाड़-तोड़ मेहनत के बावजूद एक पक्का मकान बना पाना केवल एक अधूरा सपना जान पड़ता था। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में जनपद पंचायत तोकापाल अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंगनपुर की रहने वाली 52 वर्षीय सोमारी पति रिठु राम के लिए भी जीवन की यही कठिन सच्चाई थी। पांच सदस्यों वाले इस परिवार के लिए मौसम की हर मार को झेलना रोजमर्रा की चुनौती थी, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में सोमारी के नाम 27 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले पक्के आवास की स्वीकृति मिली। योजना के प्रावधानों के अनुरूप उन्हें कुल 1 लाख 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तीन किस्तों (प्रथम किस्त 40 हजार, रुपए द्वितीय किस्त 55 हजार रुपए और तृतीय किस्त 25 हजार रुपए रुपए में प्रदान की गई, जिसकी बदौलत 1 लाख 20 हजार रुपये की लागत से एक मजबूत व सुरक्षित आशियाना बनकर तैयार हुआ। आज सोमारी का पूरा परिवार अपनी इस नई पक्की छत के नीचे गर्व, सुरक्षा और पूरे स्वाभिमान के साथ निवास कर रहा है। यह आवास केवल ईंट और गारे से बनी चारदीवारी भर नहीं है, बल्कि शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अभिसरण का एक सशक्त उदाहरण भी बना है। परिवार को एक 'पूर्ण घर' का स्वरूप देने के लिए आवास निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही 'जल जीवन मिशन' के जरिए घर के आंगन तक पाइप से शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई और स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय की सुविधा भी प्रदान की गई। आवास निर्माण के दौरान मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी का भुगतान किए जाने से परिवार को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक सहारा भी मिला। शासन की योजनांतर्गत पक्का मकान मिलने से परिवार के जीवन स्तर में कई सकारात्मक और दूरगामी सुधार देखने को मिल रहे हैं। कड़ी धूप, कड़ाके की ठंड और बारिश से स्थायी सुरक्षा मिलने के कारण मौसमी और सीलन से होने वाली बीमारियों में खासी कमी आई है, जिससे स्वास्थ्य पर होने वाले गैर-जरूरी खर्चों की बचत हो रही है। इसके अतिरिक्त, हर वर्ष कच्चे मकान की मरम्मत पर खर्च होने वाला धन अब बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य को संवारने में काम आ रहा है। एक स्थायी आशियाना मिलने से परिवार को समाज में नई प्रतिष्ठा हासिल हुई है और वे अब बिना किसी संकोच के अपने घर में अतिथियों का स्वागत सत्कार कर रहे हैं। अपनी इस उपलब्धि पर भावुक होते हुए सोमारी का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से उन्हें पक्के घर की सौगात मिली है, जिससे उनके पूरे परिवार का जीवन भर का सपना साकार हो सका है।

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