आधुनिक खेती से बदली तकदीर, इरिकपाल की फूलमती दीदी ने 10 क्विंटल से अधिक सब्जियों का किया उत्पादन

मचान विधि और मल्चिंग अपनाकर बढ़ाई पैदावार, बिहान योजना से मिली आत्मनिर्भरता को नई उड़ान

जगदलपुर, 17 अक्टूबर 2026। बस्तर जिले के इरिकपाल गांव की फूलमती दीदी आधुनिक खेती अपनाकर ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) से जुड़कर उन्होंने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के जरिए सब्जी उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी मेहनत और तकनीकी मार्गदर्शन का परिणाम है कि अब तक वे 10 क्विंटल से अधिक हरी सब्जियों का उत्पादन कर चुकी हैं।

इरिकपाल के मां दंतेश्वरी उमा स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य फूलमती दीदी ने अपने खेत में मचान विधि, मल्चिंग और वैज्ञानिक देखरेख को अपनाकर सब्जियों की सघन खेती शुरू की। उनकी बाड़ी में करेला, तोरई, बरबट्टी, परवल सहित विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों की अच्छी पैदावार हो रही है। बेहतर गुणवत्ता और ताजगी के कारण स्थानीय हाट-बाजारों में उनकी उपज की मांग बनी हुई है।

सीधे बाजार में बिक्री से मिल रहा उचित मूल्य

फूलमती दीदी सब्जियों की तुड़ाई के बाद उन्हें क्रेट्स में व्यवस्थित कर सीधे स्थानीय बाजारों में बेच रही हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। त्योहारी सीजन में हरी सब्जियों की बढ़ती मांग से उनकी बिक्री को भी लाभ मिल रहा है। नियमित उत्पादन और बाजार में सीधी पहुंच ने उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद की है।

खेती से परिवार की आर्थिक स्थिति हो रही मजबूत

फूलमती दीदी के अनुसार, स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और आईएफसी क्लस्टर के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें खेती के नए तरीके सीखने का अवसर मिला। आधुनिक पद्धतियों को अपनाने से खेती की लागत नियंत्रित करने और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिली है। सब्जी उत्पादन से होने वाली अतिरिक्त आय से वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ बच्चों की शिक्षा और पोषण पर भी ध्यान दे पा रही हैं।

नवरात्रि के दौरान बस्तर में नारी शक्ति और आत्मनिर्भरता की चर्चा के बीच फूलमती दीदी की यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। उनकी सफलता बताती है कि उचित मार्गदर्शन, सामूहिक प्रयास और आधुनिक कृषि तकनीकों के सहारे खेती को लाभकारी आजीविका का माध्यम बनाया जा सकता है। उनकी पहल से क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी समूहों से जुड़कर उन्नत खेती अपनाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित हो रही हैं।

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