UCC छत्तीसगढ़ की अस्मिता मिटाने की साजिश: आप प्रदेश प्रवक्ता तरुणा साबे बेदरकर ने सरकार पर साधा निशाना

बस्तर से सरगुजा तक आदिवासी और ओबीसी समाजों के अधिकारों पर प्रहार का आरोप, UCC के विरोध में आंदोलन की चेतावनी

जगदलपुर, 17 अक्टूबर 2026। आम आदमी पार्टी (आप) की छत्तीसगढ़ प्रदेश सचिव एवं प्रदेश प्रवक्ता तरुणा साबे बेदरकर ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC के जरिए छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाओं और विभिन्न समुदायों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़िया अस्मिता के लिए खतरा बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

तरुणा साबे बेदरकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बस्तर से सरगुजा तक बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय निवास करते हैं, जिनकी अपनी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाएं और रीति-रिवाज हैं। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के तहत जनजातीय समुदायों के अधिकारों और स्वायत्तता का सम्मान किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इन समुदायों की विवाह, गोद लेने और संपत्ति से जुड़ी परंपराओं पर किसी भी कानून के प्रभाव का गंभीरता से आकलन किया जाना आवश्यक है।

ओबीसी समाज की परंपराओं पर असर की जताई आशंका

आप प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक समुदायों की विविधता से बनी है। साहू, कुर्मी, यादव, देवांगन, केंवट, मरार, सतनामी और कबीरपंथी सहित अनेक समाजों की अपनी परंपराएं और सामाजिक व्यवस्थाएं हैं। उन्होंने आशंका जताई कि समान नागरिक संहिता इन पारंपरिक व्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती है। उनके मुताबिक, किसी भी कानून को लागू करते समय स्थानीय संस्कृति और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखना चाहिए।

लिव-इन संबंधों के पंजीकरण पर भी उठाए सवाल

तरुणा साबे बेदरकर ने लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधानों से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं और महिलाओं को कानूनी तथा सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि पंजीकरण संबंधी नियमों का दुरुपयोग होने पर लोगों को उत्पीड़न और दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

हसदेव, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों का किया उल्लेख

आप नेता ने राज्य सरकार पर हसदेव के जंगलों, बेरोजगारी और किसानों से जुड़े मुद्दों की अनदेखी का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार, कृषि और पर्यावरण जैसे विषयों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उनके अनुसार, UCC को लेकर उठ रहे विवाद से इन बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकने की आशंका है।

UCC के विरोध में आंदोलन की चेतावनी

तरुणा साबे बेदरकर ने कहा कि आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय समुदायों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर समझौता नहीं करेगी। उन्होंने मांग की कि UCC से संबंधित किसी भी निर्णय में जनजातीय समाजों की परंपराओं, पेसा कानून और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन चिंताओं को नजरअंदाज किया, तो पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी।

यह बयान आम आदमी पार्टी के बस्तर मीडिया सेल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर है।

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