बदलते बस्तर को करीब से देखा तो बोले 11 रिटायर्ड IAS अधिकारी—‘यह नए दौर का बस्तर है’

शांति, सुरक्षा और विकास ने बदली तस्वीर, बोले—देश के अग्रणी संभागों में शामिल होने की पूरी क्षमता रखता है बस्तर

जगदलपुर, 8 अक्टूबर 2026। बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास के बदलते माहौल को करीब से देखने पहुंचे अविभाजित मध्यप्रदेश के समय प्रशासनिक सेवाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके 11 सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने क्षेत्र की बदलती तस्वीर की सराहना की। बस्तर प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि बस्तर अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। यहां विकास की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और आने वाले समय में यह देश के अग्रणी संभागों में अपनी पहचान बना सकता है।

बस्तर प्रवास पर पहुंचे अधिकारियों में बीएल कुरिल, रेणु तिवारी, मनोहर दुबे, सुरेन्द्र उपाध्याय, एसएन रूपला, भरत अग्रवाल, टीसी महावर, डीडी सिंह, जयश्री कियावत, सुनीता त्रिपाठी और उल्हास तेलंग शामिल रहे।

चित्रकोट-तीरथगढ़ की खूबसूरती ने किया प्रभावित

सेवानिवृत्त अधिकारियों ने चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात सहित बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और लोक परंपराओं को करीब से देखकर उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान केवल प्राकृतिक संपदा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी कला, संस्कृति, परंपराएं और विरासत भी इसकी बड़ी ताकत हैं। अधिकारियों के अनुसार यही विशेषताएं आने वाले समय में बस्तर को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

‘बस्तर की सबसे बड़ी ताकत यहां के लोग’

ग्रामीण अंचलों का भ्रमण कर लोगों से संवाद के बाद अधिकारियों ने बस्तरवासियों को सरल, सहज और मेहनतकश बताया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यहां के लोगों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को मजबूती से सहेजकर रखा है। उनका मानना है कि बस्तर के लोगों की मेहनत और अपनी संस्कृति से जुड़ाव क्षेत्र के विकास की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

मां दंतेश्वरी के दरबार में की सुख-समृद्धि की कामना

बस्तर प्रवास के दौरान अधिकारियों ने दंतेवाड़ा पहुंचकर मां दंतेश्वरी के दर्शन किए और बस्तर की शांति, खुशहाली एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान बेहद विशिष्ट है। विकास के साथ इस विरासत को संरक्षित रखना भी जरूरी है।

अमर वाटिका में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि

जगदलपुर की अमर वाटिका पहुंचकर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने कर्तव्य के दौरान अपने प्राण न्यौछावर करने वाले जवानों को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और सुरक्षा की स्थापना में सुरक्षा बलों के जवानों का योगदान और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।

पुनर्वासित युवाओं से किया संवाद

अधिकारियों ने जगदलपुर के पण्डुम कैफे में पुनर्वासित युवाओं से मुलाकात कर उनके अनुभव जाने। युवाओं के समाज की मुख्यधारा में लौटकर नई शुरुआत करने के संकल्प की सराहना करते हुए उन्होंने उनका उत्साह बढ़ाया। इस दौरान कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह ने भी अधिकारियों से भेंट की और बस्तर आकर लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए उनका आभार जताया।

‘माओवाद का खात्मा बड़ी उपलब्धि’

सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बस्तर में माओवाद के खात्मे को क्षेत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि शांति और सुरक्षा के बेहतर वातावरण से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुली हैं।

अधिकारियों ने कहा कि प्राकृतिक संपदा, समृद्ध संस्कृति, मेहनतकश जनसमुदाय और मजबूत होती अधोसंरचना के साथ बस्तर में आगे बढ़ने की अपार क्षमता है। शांति और विकास की मौजूदा यात्रा आने वाले समय में बस्तर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।

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