जगदलपुर, 05 अक्टूबर 2026। तीन साल पहले हुए दर्दनाक हादसे में हाथ गंवाने वाले मांझीगुड़ा निवासी रोनू की जिंदगी में उस वक्त नई उम्मीद जगी, जब उन्हें कृत्रिम हाथ लगाया गया। धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर में आयोजित निःशुल्क दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर में कृत्रिम हाथ लगते ही रोनू ने खुद गिलास उठाकर पानी पिया। यह भावुक पल देखकर वहां मौजूद परिजन, डॉक्टर और शिविर से जुड़े लोग भी भावुक हो उठे।
तीन साल पहले घर में चाय बनाते समय रोनू का हाथ आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया था। गंभीर संक्रमण के कारण डॉक्टरों को उनका हाथ कोहनी तक काटना पड़ा। इसके बाद रोजमर्रा के कई कामों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।
शिविर में विशेषज्ञों ने रोनू के हाथ की माप लेकर आधुनिक कृत्रिम हाथ फिट किया। इसके बाद उन्हें हाथ के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया। कुछ ही देर बाद रोनू ने अपने हाथ से पानी का गिलास उठाया और पानी पिया। वर्षों बाद खुद पानी पी पाने की खुशी उनके चेहरे पर साफ नजर आई।
रोनू ने कहा कि हाथ कटने के बाद उन्हें लगा था कि शायद वे फिर कभी अपने हाथ से काम नहीं कर पाएंगे। लेकिन कृत्रिम हाथ मिलने के बाद पानी पीने का यह छोटा-सा पल उनके लिए बहुत बड़ी खुशी लेकर आया है।
शिविर का उद्देश्य दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनका आत्मविश्वास बढ़ाना है। रोनू का यह अनुभव इस अभियान की मानवीय संवेदना और सार्थकता की एक भावुक तस्वीर बनकर सामने आया।