नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026। UPI से भुगतान करने वाले लोगों के लिए 15 अक्टूबर 2026 से एक नया शुल्क ढांचा लागू होने जा रहा है। हालांकि, इसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर नहीं पड़ेगा। नए प्रावधान के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
सबसे अहम बात यह है कि MDR ग्राहक से नहीं, बल्कि मर्चेंट यानी दुकानदार या संबंधित कारोबारी पक्ष से लिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर 3,000 रुपये के UPI भुगतान पर 12 रुपये का MDR बनता है, लेकिन ग्राहक के बैंक खाते से 3,012 रुपये नहीं काटे जाएंगे। इसी तरह 50,000 रुपये के भुगतान पर MDR 200 रुपये और 1 लाख रुपये के भुगतान पर कैप के कारण अधिकतम 300 रुपये होगा।
दोस्तों-रिश्तेदारों को पैसे भेजना रहेगा मुफ्त
नए नियम का असर पर्सन-टू-पर्सन (P2P) भुगतान पर नहीं होगा। यानी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजना, खर्च बांटना या अपने बैंक खातों के बीच UPI से रकम ट्रांसफर करना पहले की तरह मुफ्त रहेगा। 2,000 रुपये तक के सामान्य मर्चेंट भुगतान भी इस नए मानक MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।
छोटे कारोबारियों को राहत
महीने में UPI QR के जरिए 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले निर्धारित श्रेणी के छोटे मर्चेंट को जीरो MDR की सुविधा जारी रहने की बात कही गई है। इसका मतलब है कि पात्र छोटा दुकानदार 2,000 रुपये से अधिक का एकल भुगतान भी प्राप्त कर सकता है, फिर भी मानक MDR से बाहर रह सकता है।
UPI से भुगतान करने पर दुकानदार नहीं जोड़ सकेगा अलग शुल्क
नए ढांचे में MDR को सीधे ग्राहक पर डालने से रोकने की व्यवस्था की गई है। यानी किसी सामान की कीमत 5,000 रुपये है तो केवल UPI से भुगतान करने के कारण ग्राहक से अतिरिक्त रकम वसूलने का प्रावधान नहीं है।
हालांकि, कारोबारियों की ओर से यह चिंता सामने आई है कि अतिरिक्त लागत का असर भविष्य में कीमतों या भुगतान के तरीकों पर पड़ सकता है। रिटेल क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने MDR को लेकर अपनी आपत्तियां भी जाहिर की हैं।
ऑटो-पे, SIP और OTT भुगतान का क्या होगा?
UPI AutoPay और नियमित UPI मैंडेट जैसे OTT सब्सक्रिप्शन, यूटिलिटी बिल और कुछ नियमित निवेश भुगतान इस 0.4 प्रतिशत वाले MDR के दायरे में नहीं रखे गए हैं। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े कुछ भुगतान के लिए 0.02 प्रतिशत MDR और प्रति लेन-देन 300 रुपये की सीमा बताई गई है।
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी कुछ श्रेणियों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर अलग फ्लैट MDR व्यवस्था बताई गई है। बिजली-पानी जैसे यूटिलिटी भुगतान के लिए भी रियायती शुल्क संरचना रखी गई है। ये शुल्क मर्चेंट पक्ष के हैं, ग्राहक के लिए अलग UPI शुल्क नहीं।
कुल मिलाकर, 15 अक्टूबर से UPI के इस्तेमाल पर आम ग्राहक से सीधे कोई नया ट्रांजैक्शन चार्ज लेने की बात नहीं है। बदलाव मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट भुगतान से जुड़े शुल्क ढांचे में किया गया है।