CG TET पर शिक्षकों की बड़ी मांग: 2012 से पहले नियुक्त शिक्षकों को मिले स्थायी छूट, विभागीय TET का प्रस्ताव

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने शिक्षा मंत्री के सामने रखे 10 अहम सुझाव, साल में तीन बार TET कराने और 33% उत्तीर्णांक की मांग

रायपुर, 30 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेवाकालीन शिक्षकों को TET अर्हता हासिल करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिए जाने के बाद शिक्षक संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें और सुझाव रखना शुरू कर दिया है।

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षक नई नियुक्ति पाने के लिए TET नहीं दे रहे हैं, बल्कि वे पहले से सेवा में हैं। ऐसे में उन्हें दक्ष और योग्य बनाए जाने के उद्देश्य से TET व्यवस्था में शामिल किया जाना चाहिए।

2012 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से स्थायी छूट की मांग

संजय शर्मा ने कहा कि 17 अगस्त 2012 से पहले छत्तीसगढ़ में नियुक्त शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज सकती है और इन शिक्षकों को TET से स्थायी छूट दिलाने की पहल कर सकती है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के साथ हुई चर्चा पर पूरा भरोसा है। शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने मंत्री के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें TET से स्थायी मुक्ति, पूर्व सेवा की गणना कर लाभ देने, केंद्रीय वेतनमान के जरिए वेतन विसंगति दूर करने, D.Ed. धारकों के लिए B.Ed. ब्रिज कोर्स और भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 में संशोधन अथवा निरस्तीकरण शामिल है।

अलग से हो विभागीय TET

मोर्चा ने सुझाव दिया है कि यदि TET अनिवार्यता से पूरी तरह छूट संभव नहीं होती है तो सेवारत और अनुभवी शिक्षकों के लिए अलग “विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा” आयोजित की जाए।

संगठन का कहना है कि विभाग पहले से ही शिक्षकों को प्रशिक्षण, व्यवहारिक ज्ञान और अन्य माध्यमों से लगातार दक्ष करता है। इसलिए इन-सर्विस शिक्षकों के अनुभव और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा प्रक्रिया सरल और व्यावहारिक होनी चाहिए।

साल में कम से कम तीन बार TET की मांग

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने TET को लेकर कई सुझाव सरकार के सामने रखे हैं। इनमें—

  1. सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक विभागीय सीमित TET जल्द आयोजित की जाए।
  2. TET का वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाए।
  3. शिक्षकों को पर्याप्त अवसर देने के लिए साल में कम से कम तीन बार TET आयोजित हो।
  4. परीक्षा प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध रखी जाए।
  5. पाठ्यक्रम को व्यावहारिक और सेवा-अनुभव आधारित बनाया जाए।
  6. न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 प्रतिशत निर्धारित किया जाए।
  7. TET को पदोन्नति और सेवा नियमितीकरण से जोड़ा जाए।
  8. परीक्षा का संचालन विभागीय स्तर पर सरल तरीके से किया जाए।
  9. प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक दोनों स्तरों के लिए परीक्षा आयोजित हो।
  10. विकासखंड स्तर पर केवल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाए।

कैसा हो विभागीय TET का पैटर्न?

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने परीक्षा के स्वरूप को लेकर भी विस्तृत प्रस्ताव दिया है। इसके अनुसार पेपर-I और पेपर-II आयोजित किए जाएं। प्रश्न कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 के पाठ्यक्रम, सामान्य शैक्षणिक समझ और अवधारणाओं पर आधारित हों।

प्रस्ताव में परीक्षा को ऑफलाइन OMR आधारित रखने, कुल 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछने और प्रत्येक प्रश्न के लिए एक अंक निर्धारित करने की बात कही गई है। परीक्षा की अवधि 3 घंटे रखने तथा सेवाकालीन शिक्षकों के लिए न्यूनतम उत्तीर्णांक 33/100 तय करने का सुझाव दिया गया है।

इसके अलावा पेपर-I और पेपर-II के बीच कम से कम 15 दिन का अंतर रखने तथा परीक्षा की तैयारी के लिए शिक्षकों को जल्द से जल्द अध्ययन मॉड्यूल उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

शिक्षा मंत्री के फैसले पर टिकी नजर

शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षा मंत्री के साथ हुई चर्चा में सभी विषयों पर सकारात्मक बातचीत हुई है। अब शिक्षकों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। संगठन को उम्मीद है कि सरकार सेवारत शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विभागीय TET और 2012 से पहले नियुक्त शिक्षकों को स्थायी राहत देने की दिशा में ठोस पहल करेगी।

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