बकावंड की महिला समूह ने पर्यावरण-अनुकूल राखियों से संवारी आजीविका, अब तक 10 हजार रुपये से अधिक की बिक्री
जगदलपुर, 25 अगस्त 2026। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल और प्रेरणा से बस्तर जिले के बकावंड क्षेत्र की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता के साथ पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। आड़ावाल में छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद झरना और मोंगरा फूल स्व-सहायता समूह की 10 महिलाओं ने प्राकृतिक और पारंपरिक सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार करने का काम शुरू किया है।
इन महिलाओं द्वारा धान, गेहूं, चावल और बांस जैसी पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों से राखियां तैयार की जा रही हैं। इस पहल में फरसीगांव और भेजरीपदर सहित आसपास के गांवों की महिलाएं भी उत्साहपूर्वक भागीदारी कर रही हैं।
5 हजार की लागत से शुरू हुआ काम, अब मुनाफे की ओर
महिला समूह ने शुरुआत में करीब 5 हजार रुपये की लागत से आवश्यक सामग्री जुटाई। काम बढ़ने के साथ समूह की महिलाएं अब प्रतिदिन औसतन 70 से 90 राखियां तैयार कर रही हैं। कार्य को व्यवस्थित करने के लिए महिलाओं ने जिम्मेदारियां भी बांट ली हैं। कुछ सदस्य राखी निर्माण का काम संभालती हैं, जबकि अन्य सदस्य जनपद पंचायत बकावंड और स्थानीय हाट-बाजारों में स्टॉल लगाकर राखियों की बिक्री करती हैं।
बाजार में इन हस्तनिर्मित राखियों की कीमत 30 से 40 रुपये प्रति नग रखी गई है। प्राकृतिक सामग्री से बनी इन राखियों को लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। समूह की सदस्य पार्वती के अनुसार, अब तक 10 हजार रुपये से अधिक की राखियां बिक चुकी हैं। इससे प्रारंभिक लागत भी निकल चुकी है और समूह अब मुनाफे की ओर बढ़ रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता की राह
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिल रहा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से तैयार इन राखियों के माध्यम से पारंपरिक शिल्प और स्थानीय उत्पादों को भी नई पहचान मिल रही है।
बकावंड की इन महिलाओं की पहल यह संदेश दे रही है कि स्थानीय संसाधन, हुनर और सामूहिक प्रयास मिलकर गांवों में रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।