नई दिल्ली: 18अगस्त 2026/दिल्ली के कालकाजी इलाके से इंसानियत और पारिवारिक रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। मशहूर संगीतकार रवि डे का शव उनके गोविंदपुरी स्थित किराए के मकान में करीब पांच दिनों तक पड़ा रहा। पड़ोसियों से बदबू आने की शिकायत मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर शव बरामद किया।
पुलिस के अनुसार, रवि डे घर में अकेले रहते थे। उनके दोनों बेटे लाजपत नगर में रहते हैं। 14 अगस्त को पीसीआर के जरिए पुलिस को घर से तेज बदबू आने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने पाया कि मकान का दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा तोड़कर पुलिस अंदर दाखिल हुई तो बाथरूम के पास रवि डे का शव पड़ा मिला। शव की हालत काफी खराब हो चुकी थी और उसमें कीड़े पड़ गए थे।
पुलिस ने बेटों को दी सूचना, पहले आने से किया इनकार
पुलिस ने रवि डे के दोनों बेटों को उनके पिता की मौत की सूचना दी। बताया जा रहा है कि बेटों ने तत्काल मौके पर आने में असमर्थता जताई और कहा कि “अभी हमें फुर्सत नहीं है।” इसके बाद पुलिस ने उन्हें समझाया, जिसके बाद वे 16 अगस्त को एम्स में पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों बेटे शव को अपने साथ ले गए।
जिस घर से संगीत की धुनें आती थीं, वहीं से उठी बदबू
पड़ोसियों के मुताबिक, रवि डे के घर से अक्सर संगीत की धुनें सुनाई देती थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसी घर से तेज बदबू आने लगी, जिसके बाद पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। समय पर सूचना मिलने के कारण पुलिस घर तक पहुंच सकी।
सोनीपत के मामले की भी आई याद
कालकाजी की इस घटना ने हाल ही में सोनीपत में सामने आए एक मामले की याद दिला दी। वहां एक ओल्ड एज होम में 74 वर्षीय शिव चरण राम रत्न गुप्ता की मौत के बाद उनकी तीन बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई थीं। बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अंतिम दर्शन किए और 5100 रुपये में अंतिम संस्कार कराया गया था।
दिल्ली का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि बुजुर्ग माता-पिता के अकेलेपन और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?