महासमुंद। 17अगस्त 2026/जिले के ऐतिहासिक सुअरमार गढ़ क्षेत्र में मकान निर्माण के दौरान जमीन के भीतर से मिले स्वर्ण रंग के धातु अवशेष ने पुरातत्व प्रेमियों और स्थानीय लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी है। कोमाखान क्षेत्र निवासी विजय कुमार पांडे के मकान निर्माण के दौरान करीब तीन फीट की गहराई में खुदाई करते समय यह धातु खंड मिला।
मिली वस्तु चपटी और अनियमित आकार की है। इसकी सतह पर दबाव और मोड़ के निशान दिखाई दे रहे हैं, जिससे प्रथम दृष्टया यह हथौड़े से पीटकर तैयार की गई धातु की पट्टिका या पत्र जैसी प्रतीत होती है। हालांकि इसे स्थानीय स्तर पर स्वर्ण धातु का अवशेष माना जा रहा है, लेकिन अब तक वैज्ञानिक जांच से यह पुष्टि नहीं हुई है कि वस्तु वास्तव में सोने की है।
पुरानी खपरैल और काली मिट्टी भी मिली
धातु अवशेष के साथ मौके से पुरानी खपरैल के टुकड़े और काली मिट्टी भी मिली है। इन अवशेषों ने इस संभावना को जन्म दिया है कि अतीत में यह स्थान किसी पुराने आवासीय परिसर, संरचना या अन्य महत्वपूर्ण स्थल का हिस्सा रहा हो सकता है।
जांच से खुल सकता है इतिहास
विशेषज्ञों के अनुसार धातु की वास्तविक संरचना और उसकी उम्र का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी है। एक्स-रे फ्लोरेसेंस (XRF) जैसी तकनीक से धातु में मौजूद तत्वों की पहचान की जा सकती है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह स्वर्णपत्र, आभूषण का हिस्सा, धार्मिक सामग्री, राजकीय अलंकरण या किसी अन्य प्राचीन वस्तु का अंश है।
पुरातात्त्विक सर्वेक्षण की मांग
इस खोज के बाद सुअरमार गढ़ क्षेत्र का व्यवस्थित पुरातात्त्विक सर्वेक्षण कराने की मांग भी उठने लगी है। जानकारों का कहना है कि मिले अवशेष का वैज्ञानिक परीक्षण कराने के साथ-साथ प्राप्ति स्थल की स्तरीय खुदाई, आसपास के पुरावशेषों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जाना चाहिए।
फिलहाल इस धातु अवशेष को मध्यकालीन या उससे भी प्राचीन बताना जल्दबाजी होगी। इसकी वास्तविक पहचान और काल निर्धारण विशेषज्ञों की वैज्ञानिक जांच के बाद ही संभव होगा। लेकिन तीन फीट की गहराई से मिले धातु खंड के साथ पुरानी खपरैल और काली मिट्टी की मौजूदगी ने सुअरमार गढ़ के पुरातात्त्विक अतीत को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।