पत्थर जैसा हो रहा था शरीर, AIIMS रायपुर में इलाज से बालिका को मिली नई जिंदगी

दंतेवाड़ा 13अगस्त 2026दंतेवाड़ा/की गंभीर रूप से बीमार बालिका के स्वास्थ्य में एम्स रायपुर में उपचार के बाद आया उल्लेखनीय सुधार; बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की पहल से मिला बेहतर इलाज
रायपुर। गंभीर बीमारी से जूझ रही दंतेवाड़ा की एक बालिका के जीवन में अब उम्मीद की नई किरण जगी है। कभी उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि उसका शरीर धीरे-धीरे पत्थर जैसा होता जा रहा था। ऐसे मुश्किल हालात में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की संवेदनशील पहल और लगातार निगरानी के बाद बालिका को एम्स रायपुर में विशेषज्ञ उपचार मिला। इलाज के बाद उसके स्वास्थ्य में करीब 80 प्रतिशत तक सुधार हुआ है।
कलेक्टर से चर्चा के बाद शुरू हुई उपचार की पहल
बालिका की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी मिलने पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने दंतेवाड़ा कलेक्टर से चर्चा कर बालिका के बेहतर उपचार, देखभाल और जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का आग्रह किया। इसके बाद जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी और उपचार के लिए आवश्यक सहयोग एवं समन्वय किया।
एम्स रायपुर में विशेषज्ञों ने संभाला मोर्चा
बालिका को बेहतर और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एम्स रायपुर में उपचार की व्यवस्था की गई। त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यकी गांगुली, डॉ. नम्रता छाबड़ा सहित बहुविषयक चिकित्सा टीम ने बालिका की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया।
चिकित्सकों ने उसकी जरूरत के अनुसार चरणबद्ध उपचार योजना तैयार की। उपचार के दौरान त्वचा संबंधी समस्याओं के साथ-साथ पोषण, संक्रमण से बचाव और अन्य स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर भी लगातार ध्यान दिया गया।
80 प्रतिशत सुधार से परिवार में लौटी खुशी
एम्स के चिकित्सकों के अथक प्रयास, दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग और डॉ. वर्णिका शर्मा की लगातार पहल व निगरानी का सकारात्मक परिणाम सामने आया। वर्तमान में बालिका के स्वास्थ्य में करीब 80 प्रतिशत सुधार बताया गया है। इस बदलाव से उसके परिजनों में खुशी का माहौल है और अब उसके पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटने की उम्मीद बढ़ गई है।
लगातार लेती रहीं स्वास्थ्य की जानकारी
डॉ. वर्णिका शर्मा बालिका के स्वास्थ्य की प्रगति की लगातार जानकारी लेती रहीं। उन्होंने चिकित्सकों और अधिकारियों से समन्वय बनाए रखा, ताकि बालिका को समय पर उपचार, पोषण और जरूरी देखभाल मिलती रहे।
“हर बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य और सम्मान के साथ जीने का अधिकार”
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने बालिका के उपचार में एम्स के चिकित्सकों के समर्पण और जिला प्रशासन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य में 80 प्रतिशत सुधार बेहद उत्साहजनक है और प्रयास रहेगा कि बालिका पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटे।
मुश्किल हालात में उम्मीद की मिसाल
गंभीर बीमारी से जूझ रही इस बालिका के स्वास्थ्य में आया सुधार उसके परिवार के लिए बड़ी राहत है। साथ ही यह उदाहरण भी सामने आया है कि समय पर विशेषज्ञ उपचार, संवेदनशील प्रशासनिक पहल और लगातार प्रयासों से गंभीर परिस्थितियों में भी जिंदगी को नई उम्मीद दी जा सकती है।

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