बिलासपुर, 13 अगस्त 2026। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से करीब ₹80.36 करोड़ की संपत्ति कुर्क किए जाने के मामले में मोक्षित कॉरपोरेशन को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कंपनी द्वारा ED की कार्रवाई को चुनौती देते हुए दायर की गई रिट याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
ED ने PMLA की धारा 5(1) के तहत कार्रवाई करते हुए मोक्षित कॉरपोरेशन की करीब ₹80.36 करोड़ मूल्य की 46 चल-अचल संपत्तियां कुर्क की थीं। यह कुर्की आदेश 13 मार्च 2026 को जारी किया गया था।
कंपनी ने कुर्की को दी थी चुनौती
मोक्षित कॉरपोरेशन की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका में ED की कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा गया था कि कंपनी की वैध कारोबारी गतिविधियों से अर्जित मुनाफे को अपराध की आय के तौर पर माना गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीधे रिट याचिका दाखिल किए जाने पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि PMLA के तहत कुर्की की कार्रवाई को चुनौती देने के लिए कानूनी और वैधानिक प्रक्रिया उपलब्ध है।
पहले Adjudicating Authority जाने का निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष को पहले निर्णयन प्राधिकरण (Adjudicating Authority) के समक्ष अपनी आपत्ति रखनी चाहिए। असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर सीधे हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल करना उचित नहीं है।
इसी आधार पर न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने मोक्षित कॉरपोरेशन की याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरे मामले का मतलब?
हाईकोर्ट के इस आदेश का सीधा अर्थ यह है कि फिलहाल कंपनी की ओर से दाखिल रिट याचिका के जरिए ED की कुर्की को चुनौती नहीं दी जा सकी है। कंपनी को उपलब्ध वैधानिक प्रक्रिया के तहत संबंधित Adjudicating Authority के समक्ष अपना पक्ष रखने का रास्ता अपनाना होगा।
नोट: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश की प्रति उपलब्ध होने पर उसमें दर्ज कानूनी टिप्पणियों और आगे की प्रक्रिया की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।