जयपुर13अगस्त 2026/रामगढ़ बांध से जुड़े 15 साल पुराने जनहित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट में आज फिर सुनवाई होगी। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में बांध के प्रवाह क्षेत्र में बने होटल, रिसोर्ट और फार्म हाउस समेत अन्य निर्माणों को लेकर सख्त नाराजगी जताई थी। अब जयपुर कलेक्टर को अतिक्रमण और जलप्रवाह में आ रही बाधाओं से जुड़ी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी है।
हाईकोर्ट ने 12 अगस्त 2011 को राजस्थान पत्रिका की ‘मर गया रामगढ़’ शीर्षक से प्रकाशित फोटो स्टोरी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी। यानी इस मामले को अब पूरे 15 वर्ष हो चुके हैं।
कलेक्टर की रिपोर्ट पर रहेगी नजर
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा था कि बांध के प्रवाह क्षेत्र में किन लोगों के होटल, रिसोर्ट और फार्म हाउस पानी के रास्ते में बाधा बन रहे हैं। ऐसे में आज पेश होने वाली रिपोर्ट में अतिक्रमणकारियों और पक्के निर्माणों की स्थिति स्पष्ट होना अहम माना जा रहा है।
कोर्ट के सामने उठ सकते हैं ये सवाल
- क्या कलेक्टर की रिपोर्ट में होटल, रिसोर्ट और फार्म हाउस जैसे पक्के निर्माणों का स्पष्ट उल्लेख है?
- सर्वे मौके पर जाकर किया गया या सिर्फ कार्यालय स्तर पर रिपोर्ट तैयार की गई?
- वर्ष 2012 में दिए हाईकोर्ट के आदेशों का कितना पालन हुआ?
- कैचमेंट एरिया का डिमार्केशन और अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कहां तक पहुंची?
- जलप्रवाह में बाधा बने निर्माणों को हटाने के लिए क्या ठोस कार्रवाई की गई?
सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे का विकल्प
यदि कोर्ट को प्रशासन की रिपोर्ट अधूरी या असंतोषजनक लगती है तो स्वतंत्र सर्वे का आदेश दिया जा सकता है। जलप्रवाह क्षेत्र की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए सैटेलाइट इमेजिंग और ड्रोन सर्वे कराने का विकल्प भी सामने आ सकता है। कोर्ट मौके की जांच के लिए कोर्ट कमिश्नर या स्वतंत्र अधिवक्ताओं की नियुक्ति भी कर सकता है।
अतिक्रमणकारियों के नाम उजागर करने पर जोर
पिछली सुनवाई की सख्त टिप्पणियों के बाद आज कोर्ट होटल, रिसोर्ट और फार्म हाउस संचालकों के नाम, स्वामित्व और एनओसी की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दे सकता है। साथ ही रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।
रामगढ़ बांध के प्रवाह क्षेत्र को बहाल करना इस पूरे मामले का सबसे अहम मुद्दा है। बीसलपुर जैसे बाहरी जलस्रोतों से पानी लाने के बजाय बांध के प्राकृतिक जलप्रवाह को बहाल करने पर जोर दिए जाने की संभावना है।
अब निगाहें हाईकोर्ट के आज के आदेश और प्रशासन की रिपोर्ट पर हैं—क्योंकि 15 साल पुराने इस मामले में सवाल सिर्फ रामगढ़ बांध के अस्तित्व का नहीं, बल्कि जयपुर के जलभविष्य का भी है।