मत्स्य अंगुलिका उत्पादन बना अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया, अब बढ़ेगा कारोबार
जगदलपुर, 28 जुलाई 2026। मछली पालन विभाग की स्पान संवर्धन योजना बस्तर जिले के ग्रामीण किसानों के लिए आय का नया द्वार खोल रही है। बस्तर विकासखंड के ग्राम सिवनी की महिला किसान मनकी बघेल ने इस योजना का लाभ लेकर महज दो माह में 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
मत्स्यपालन विभाग ने मई माह में मनकी बघेल को मिश्रित प्रजाति के लगभग 25 हजार स्पॉन उपलब्ध कराए। इसके साथ ही तालाब की उर्वरता बढ़ाने के लिए खाद तथा स्पॉन के आहार के रूप में खल्ली भी निःशुल्क प्रदान की गई। मनकी ने अपने परिवार के एक एकड़ क्षेत्र में स्थित दो तालाबों में स्पॉन का संवर्धन शुरू किया। नियमित देखभाल, समय पर आहार और सतत निगरानी के कारण कम समय में ही गुणवत्तायुक्त मत्स्य अंगुलिकाएं तैयार हो गईं।
योजना के तहत विभाग ने अंगुलिकाओं की पैकेजिंग और विपणन के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, पॉलिथीन बैग, बोरी और निःशुल्क जाल भी उपलब्ध कराया, जिससे मत्स्य बीज को सुरक्षित रूप से बाजार तक पहुंचाना आसान हो गया।
मनकी बघेल के भतीजे सुखलाल बघेल ने बताया कि अब तक लगभग 30 किलोग्राम मत्स्य अंगुलिकाओं की बिक्री 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा चुकी है, जिससे परिवार को सीधे 15 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तालाब में करीब 50 किलोग्राम अंगुलिकाएं और तैयार हैं, जिनकी बिक्री से अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है।
सुखलाल के अनुसार, अंगुलिका उत्पादन सामान्य मछली पालन की तुलना में अधिक लाभकारी साबित हो रहा है। इसी सफलता से उत्साहित होकर परिवार ने अगले वर्ष इस गतिविधि का विस्तार करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में परिवार सात एकड़ भूमि में उन्नत धान की खेती तथा रबी सीजन में मक्का एवं साग-सब्जियों का उत्पादन करता है। अब कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन और अंगुलिका उत्पादन भी परिवार की आय का सशक्त आधार बनता जा रहा है।
यह सफलता कहानी दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर ग्रामीण किसान और महिला स्व-सहायता समूह आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में नई ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं।