बिलासपुर, 24 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक पदों पर नियमित भर्ती नहीं किए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया (आईएएस) को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मामला वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक पदों पर 100 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान रखा गया था। इस प्रावधान को चुनौती देते हुए अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 9 मार्च 2023 को दिए अपने फैसले में उक्त प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के विपरीत बताते हुए असंवैधानिक घोषित कर निरस्त कर दिया था।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने न तो भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किया और न ही छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) को संशोधित अधियाचन भेजा। इसके कारण तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
अवमानना याचिका में यह भी कहा गया है कि CGPSC ने 15 मार्च 2023 को विभाग को पत्र भेजकर हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप संशोधित अधियाचन भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, विभाग ने 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया, जिसे भी अभ्यर्थियों ने अदालत में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं ने विभाग की कार्रवाई को हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना बताते हुए अवमानना कार्रवाई की मांग की है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने 23 जुलाई 2026 को चिकित्सा शिक्षा सचिव अमित कटारिया को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब सचिव की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।