नई दिल्ली, 2 अगस्त 2026। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेपर लीक रोधी कानून में संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही यह संशोधित कानून लागू हो गया है। नए कानून के तहत अब पेपर लीक मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी और 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाने का प्रावधान किया गया है।
नए कानून के अनुसार, पेपर लीक के दोषियों को अब 5 से 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इससे पहले वर्ष 2024 के कानून में 3 से 5 वर्ष की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह संशोधन परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और निष्पक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस कानून का उद्देश्य पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को समाप्त करना और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
नए कानून की प्रमुख बातें
- पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा।
- मामलों की रोजाना सुनवाई कर 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा किया जाएगा।
- दोषियों को 5 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान।
- 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया जाएगा।
- जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने से प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी और युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा और मजबूत होगा।