जबलपुर23 जुलाई 2026 / शहर को अधिक स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत अब ऐसे बड़े संस्थानों को अपने परिसर में ही गीले कचरे का निस्तारण करना होगा, जो प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न करते हैं। इस नई व्यवस्था के तहत होटल, अस्पताल, उद्योग, शैक्षणिक संस्थान, मैरिज गार्डन और बड़े आवासीय परिसर सीधे तौर पर दायरे में आएंगे।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर में 200 से अधिक ऐसे संस्थानों की पहचान की गई है, जहां प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक कचरा निकलता है। इनमें से करीब 50 संस्थानों ने आवश्यक पंजीयन प्रक्रिया पूरी कर ली है, जबकि अन्य संस्थानों का पंजीयन जारी है। सभी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन संस्थानों को अपने परिसर में कम्पोस्ट यूनिट, बायोगैस प्लांट या ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर जैसी वैज्ञानिक तकनीकें स्थापित करनी होंगी। इसके माध्यम से निकलने वाले गीले कचरे को खाद या अन्य उपयोगी संसाधनों में बदला जाएगा। वहीं प्लास्टिक, कागज और अन्य सूखा कचरा नगर निगम की व्यवस्था के तहत एकत्र किया जाएगा।
योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू जल संरक्षण से जुड़ा है। जिन संस्थानों में प्रतिदिन 11 हजार लीटर से अधिक पानी का उपयोग होता है, उन्हें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करना होगा। उपचारित पानी का उपयोग बागवानी, फ्लशिंग और अन्य गैर-पीने योग्य कार्यों में किया जाएगा, जिससे जल संसाधनों पर दबाव कम होगा।
नगर निगम का मानना है कि इस व्यवस्था से कचरा परिवहन में कमी आएगी, ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन घटेगा। साथ ही शहर के कचरा प्रसंस्करण केंद्रों पर पड़ने वाला भार भी कम होगा। कचरे का स्रोत पर ही प्रबंधन होने से दुर्गंध, गंदगी और प्रदूषण जैसी समस्याओं में भी कमी आने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि यह पहल न केवल स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि जबलपुर को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी नई पहचान दिला सकती है। शहरवासियों को स्वच्छ वातावरण मिलने के साथ-साथ नगर निगम के संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव हो सकेगा।
बड़ी पहल: अब बड़े होटल, अस्पताल और संस्थान खुद संभालेंगे अपना कचरा, नगर निगम ने शुरू की नई व्यवस्था