शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे स्कूल, 34 प्राथमिक विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे; ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, कई स्कूलों में जड़े ताले

बालोद23 जुलाई 2026/ जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए डेढ़ महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कई स्कूल आज भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि जिले के 34 प्राथमिक विद्यालयों में केवल एक शिक्षक के सहारे बच्चों की पढ़ाई चल रही है, जबकि दो स्कूल पूरी तरह शिक्षकविहीन बताए जा रहे हैं। इससे नाराज ग्रामीणों और पालकों ने कई स्कूलों में तालाबंदी कर विरोध दर्ज कराया है।

जानकारी के अनुसार, बालोद जिले में सहायक शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। लगातार सेवानिवृत्ति, स्थानांतरण, पदोन्नति और नई भर्ती नहीं होने के कारण स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता लगातार घटती जा रही है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को संभालना पड़ रहा है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौती बन गया है।

सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र डौंडी और डौंडीलोहारा विकासखंड बताए जा रहे हैं, जहां अनेक स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। शिक्षा विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत दूसरे स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का प्रयास किया है, लेकिन इससे भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में कई गांवों में पालकों और ग्रामीणों ने स्कूलों में ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है और बार-बार मांग करने के बावजूद पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। कुछ गांवों में आगे भी तालाबंदी और आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले के कई शिक्षक अन्य विभागों में संलग्न हैं, जिसके कारण मूल स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हालांकि हाल ही में ऐसे शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

जिला शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षकविहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की जानकारी शासन को भेज दी गई है। रिक्त पदों को भरने के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई अपेक्षित है। विभाग का दावा है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए अस्थायी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन ग्रामीण स्थायी समाधान और नियमित भर्ती की मांग पर अड़े हुए हैं।

शिक्षकों की कमी और लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने बालोद जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और शिक्षा विभाग इस समस्या का समाधान कब तक निकाल पाते हैं।

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