गरियाबंद6जुलाई 2026/छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश अब जनजीवन पर भारी पड़ने लगी है। गरियाबंद जिले के छुरा और फिंगेश्वर क्षेत्र में बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि छुरा-कुसमी मार्ग पर बरसाती नाले पर बना कोसुमबूड़ा पुल तेज बहाव की चपेट में आकर ढह गया। पुल टूटने से 10 से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया, जिससे हजारों ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, पिछले 24 घंटे से क्षेत्र में लगातार तेज बारिश हो रही है। बारिश के कारण बरसाती नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया और तेज बहाव पुल की क्षमता से अधिक होने के कारण वह क्षतिग्रस्त होकर ढह गया। पुल टूटते ही छुरा-कुसमी मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया।
इस घटना के बाद नवापारा, सारागांव, दुल्ला, चुरकीदादर, बम्हनी सहित 10 से अधिक गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है। ग्रामीणों को अब अस्पताल, बाजार, बैंक, स्कूल, शासकीय कार्यालय और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप—पहले से जर्जर था पुल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोसुमबूड़ा पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से नए पुल के निर्माण की मांग की गई, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर पुल का पुनर्निर्माण कर दिया जाता तो आज यह स्थिति नहीं बनती।
घरों में घुसा पानी, बढ़ी मुश्किलें
लगातार बारिश के कारण छुरा और फिंगेश्वर क्षेत्र के कई गांवों में जलभराव की स्थिति बन गई है। कई घरों में बारिश का पानी घुस गया है, जिससे लोगों का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को पानी निकालने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं खेतों और कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
मरीज, छात्र और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
पुल टूटने का सबसे अधिक असर मरीजों, विद्यार्थियों और किसानों पर पड़ा है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत हो रही है, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और किसानों के लिए खेती-किसानी का कार्य बाधित हो गया है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा और जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
प्रशासन अलर्ट, लेकिन ग्रामीणों को राहत का इंतजार
जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए रखने और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की गई है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल निगरानी से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने तत्काल अस्थायी वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
हर मानसून में उजागर होती है व्यवस्था की कमजोरी
कोसुमबूड़ा पुल का ढहना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों के कमजोर बुनियादी ढांचे पर सवाल खड़े करता है। हर साल बारिश के दौरान सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से गांवों का संपर्क टूट जाता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी मरम्मत के बजाय मजबूत और दीर्घकालिक निर्माण कार्यों पर ध्यान देना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।